जी-20 शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर आम सहमति बनने की जानकारी देते विदेश मंत्री।
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अमेरिका और चीन के बीच टकराव बना बाधा
कांत ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर आम सहमति बनाने से पहले आई एक और बाधा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूस के बाद चीन ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय टकराव के चलते आम सहमति से इनकार कर दिया। चीन का कहना था कि 2026 में जी-20 शिखर सम्मेलन अमेरिका में होगा। अमेरिका उन्हें वीजा नहीं देगा, यहां तक कि हांगकांग में उनके गवर्नर के लिए भी नहीं। चीन ने कहा कि जब तक उन्हें लिखित गारंटी नहीं मिल जाती कि उन्हें वीजा जारी किया जाएगा, तब तक सहमत नहीं होंगे।
एक घंटे पहले पीएम बोले आम सहमति बनाना जरूरी
शेरपा अमिताभ कांत ने किताब में लिखा कि नौ सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक शुरू होने से पहले पीएम मोदी भारत मंडपम आए थे। मुझे उनको घोषणा-पत्र की प्रगति के बारे में बताना था। जब मैंने उनको अमेरिका और चीन के मुद्दे के बारे में बताया तो वे थोड़ा रुक गए। पीएम ने कहा कि बहुपक्षीय बैठक में द्विपक्षीय मुद्दे क्यों उठाए जा रहे हैं? फिर उन्होंने कहा कि हम किसी प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहते बल्कि परिणाम के तौर पर आम सहमति चाहते हैं।
तुरंत बैठक की और चीन को तैयार किया
इसके बाद एक ओर नौ बजे सुबह जी-20 देशों के नेताओं की बैठक शुरू हुई तो वहीं दूसरी ओर हॉल से सटे कमरे में मैंने दोनों देशों के शेरपाओं से बात की। मैंने पाइल और ली के साथ मिलकर पत्र के विवरण तैयार किए। हमने गारंटी के बजाय सुनिश्चित शब्द का उपयोग करने का विकल्प चुना। दोपहर तक यह मामला सुलझ गया। चीन की सहमति और अमेरिका की दोनों शर्तें पूरी होने पर, रूस, अमेरिका, चीन, जी-7 तथा सभी देश घोषणा-पत्र के लिए सहमत हो गए।
पहली बार बनी सहमति
नई दिल्ली में जी-20 के दौरान पहली बार ऐसा हुआ कि नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर पहले ही दिन सहमति बन गई। जबकि 2022 के बाली शिखर सम्मेलन में ऐसा नहीं हुआ था, जहां घोषणा-पत्र पर बातचीत अंतिम घंटों तक चलती रही थी। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी। कांत की पुस्तक में बताया गया है कि कैसे भारत जो कभी विकासशील शक्ति के रूप में देखा जाता था, वह वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने के लिए उभरा। भारत ने समाधान प्रस्तुत करते हुए, गठबंधन बनाते हुए, एक स्थायी विरासत का निर्माण करते हुए विकासशील और विकसित दोनों विश्वों की आकांक्षाओं पूरा किया। पुस्तक की प्रस्तावना विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लिखी है।