बीते साल इंडोनेशिया में संपन्न जी-20 शिखर सम्मेलन के बाली घोषणा पत्र की आलोचनाओं पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि इसकी बातचीत में भारत की अहम भूमिका थी। मंगलवार को सूत्रों ने कहा है कि हमने बाली घोषणापत्र पर कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित और पक्षपाती टिप्पणियां देखी हैं। जबकि तथ्य यह है कि यह भारत की सुविचारित और संतुलित स्थिति है जिसने बाली घोषणा को बनाने में योगदान दिया।
सूत्रों ने यह भी कहा कि खास तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के इस कथन कि 'यह युद्ध का युग नहीं है', की सभी ने खूब सराहना की। हमारा प्रयास जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में बाली की सहमति को प्रदर्शित करना था। यह घोषणापत्र में व्यक्त किया गया था। ऐसे में इसकी कोई भी आलोचना गलत और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
दरअसल, यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से जी20 के सदस्य देशों के बीच घोषणापत्र के कुछ मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। उन मुद्दों के कारण 15 दौर की मंत्रिस्तरीय वार्ता के बावजूद पूरा संगठन दो खेमे में बंटा हुआ था। खास तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देश घोषणापत्र के ही बिना ही शिखर सम्मेलन के समापन पर तैयार थे। दिसके बाद भारत ने अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर कोशिश की थी।
चीनी विदेश मंत्री किन गैंग भारत में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में होंगे शामिल
चीन के विदेश मंत्री किन गैंग दो मार्च को भारत की यात्रा पर होगें। उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य यहां जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेना है। इस दौरान उनके विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक करने की उम्मीद भी है। बीते साल दिसंबर में विदेश मंत्री और स्टेट काउंसलर वांग यी की जगह लेने के बाद किन की यह पहली भारत यात्रा होगी।
इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री वांग ने 2019 में सीमा तंत्र पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया था। इसके बाद 2022 में उन्होंने नई दिल्ली की यात्रा की थी।