दिल्ली में आरजेडी, एसपी और सीपीआई सांसदों ने संसद परिसर में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और बीजेपी सरकार को घेरा। लोकसभा में मामले पर जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देवरिया मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और जिलाधिकारी को भी तुरंत हटाया गया। सरकार दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनाथ ने कहा कि बाल सुधार गृह की संचालिका को जेल भेजने का काम किया और वरिष्ठतम अधिकारियों को मामले की जांच सौंपी गई है और कहा कि जो भी अपराधी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि बाल सुधार गृहों के लिए सभी राज्यों को एडवाइडरी भेजी जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हो।
वहीं उत्तर प्रदेश की महिला व बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने भी इस मामले पर मंगलवार को कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। रीता ने कहा कि इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यह लापरवाही के चलते हुए कहा या सोची-समझी साजिश के तहत, यह मामले पर रिपोर्ट्स आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा, 'सीएम ने खुद इस मामले को संज्ञान में लिया है और वह इस मामले में जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रीता ने राजनीतिक दलों पर मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'वे राजनीतिक दल इसे राजनीति का मुद्दा बना रहे हैं, जिनके संरक्षण में यह बालिका गृह चलता रहा।बता दें कि देवरिया के इस शेल्टर होम से 24 लड़कियों को मुक्त कराया गया है और करीब 18 लड़कियां अभी भी गायब हैं। शेल्टर होम को प्रशासन ने सील कर दिया है।
- जिला प्रशासन के नवंबर 2017 में मारे छापे में कम उम्र के किशोरों ने शिकायत दी कि यहां स्टाफ नशीली दवाएं मुहैया करवाता है। कुछ बड़ी उम्र के किशोरों द्वारा यौन शोषण के आरोप भी लगे, जिनकी कभी विस्तृत जांच नहीं की गई।
- दिसंबर 2016 में यहां से चार बच्चे छत से कूद कर भागे थे। इनमें से दो रेलवे स्टेशन से बरामद हुए, लेकिन बाकियों का कोई सुराग नहीं मिला। बरामद बच्चों ने बताया कि उन्हें स्टाफ व अधीक्षक पीटते थे।
- कार्रवाई के नाम पर जांच हुई और संविदा कर्मचारियों का दूसरे बाल गृह में स्थानांतरण कर दिया गया।
- लेकिन ज्यादा गंभीर मामले बच्चों की मौतों के थे। 2017 में यहां शरण दिलाए गए एक नवजात बच्चे के पैर में संक्रमण हुआ जिसकी बाद में झलकारी में मौत हो गई। बच्चे का पैर स्टाफ की लापरवाही से प्रेस से जला था। हालांकि कर्मचारियों की सख्त जांच नहीं हुई, इसलिए मौत का राज नहीं खुल सका।
- निजी हाथों में रहे 100 से अधिक वर्ष पुराने इसे अनाथालय से 2013 में बच्चे जयपुर के दंपती को गोद दिलवाया गया। उस समय अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी थी। बाद में सामने आया कि उस बच्चे की मां निशा जीवित थी और उससे जबरन वह बच्चा लिया गया था। बच्चे के लिए निशा हाईकोर्ट तक लड़ी, डीएनए टेस्ट करवाए गए, जिसमें साबित हुआ कि बच्चा उसी का ही है। लेकिन उस समय भी बच्चा निशा को वापस नहीं मिला, मुकदमे में दूसरा पक्ष आगे की तारीखें लेता चला गया।
- एक्शन के नाम पर केवल अनाथालय में बाल कल्याण समिति ने लावारिस बच्चों को शरण दिलाना बंद कर दिया। प्रशासन ने मान्यता खत्म की और निजाम बदला गया।
- फिलहाल 35 बच्चे हैं, नए संचालकों के सुधार कार्यों के बाद वापस यहां लावारिस बच्चों को शरण दिलाई जाने लगी है।
शहर के बच्चों के हितों के संरक्षण की पहली न्यायिक संस्थान बाल कल्याण समिति को माना जाता है। इसके अध्यक्ष कुलदीप रंजन ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में माना कि बालगृहों में बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी हो रही है। समिति ने इस पर कार्रवाई भी की है।
वहीं सरकारी बालगृह लावारिस और जरूरतमंद बच्चों को शरण दिलाने के दौरान राजकीय बालगृह स्टाफ ज्यादा असहयोग करता है। जबकि प्राइवेट बालगृहों में बच्चों को शरण दिलाना आसान है।
बता दें कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की तरह ही देवरिया नारी संरक्षण गृह में भी देह व्यापार कराए जाने का खुलासा हुआ। संरक्षण गृह से भागी एक बालिका ने रविवार शाम को यह जानकारी दी। रात में पुलिस ने छापा मारा तो संरक्षण गृह से 18 लड़कियां गायब मिलीं। पुलिस ने संचालिका और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया कांड पर बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएम सुजीत कुमार को हटा दिया है और दो अफसरों को निलंबित कर दिया है। मामले पर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर का कहना है कि मामले की समग्र जांच की जाएगी। जिला प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
रविवार देर रात पुलिस अधीक्षक रोहन पी. कनय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मां विंध्यवासिनी महिला एवं बालिका संरक्षण गृह की सूची में 42 लडकियां दर्ज हैं। लेकिन छापे में मौके पर केवल 24 मिलीं। बाकी का पता किया जा रहा है। नारी संरक्षण गृह के बारे में लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। अनियमितताओं के कारण इसकी मान्यता जून-2017 में समाप्त कर दी गई थी। सीबीआई ने भी संरक्षण गृह को अनियमितताओं में चिह्नित कर रखा है। संचालिका हाईकोर्ट से स्थगनादेश लेकर इसे चला रही हैं।
एसपी ने बताया कि बिहार के बेतिया जिले की 10 साल की बच्ची देर शाम को किसी तरह संरक्षण गृह से निकलकर महिला थाने पहुंची। वहां उसने संरक्षण गृह की अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी। बच्ची के मुताबिक, वहां शाम चार बजे के बाद रोजाना कई लोग काले और सफेद रंग की कारों से आते थे और मैडम के साथ लड़कियों को लेकर जाते थे। वे देर रात लौटती थीं। संरक्षण गृह में भी गलत काम होता है। बच्ची ने बताया, उससे भी झाड़ू-पोंछा तथा घर के अन्य काम कराए जाते थे।
एसपी ने बताया कि पुलिस ने रात में ही नारी संरक्षण गृह में छापा मारा। वहां रजिस्टर में अलग-अलग आयु वर्ग की 42 लड़कियां दर्ज हैं। मिलान करने पर 18 लड़कियां नहीं मिलीं। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति मोहन इनके बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पत्रकार वार्ता में एसपी के साथ जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार और बाल संरक्षण अधिकारी जेडी तिवारी मौजूद थे।