कश्मीर में आतंक की आग फैलाने वाले आतंकी संगठन को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। ये वो आतंकी संगठन है जिसे कश्मीर के भीतर हिंसा की आग भड़काने और कश्मीर को भारत से अलग करके पाक में शामिल करने के मकसद से बनाया गया था।
सितंबर 1989 में मुहम्मद एहसान डार ने इस आतंकी संगठन की नींव कश्मीर के अलगाववादियों को भड़काने के लिए रखी थी। फिलहाल पाक में बैठा हिजबुल का मुखिया सैय्यद सलाहुद्दीन है जिसे इसी साल अमेरिका पहले ही इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर चुका है।
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1989 में संगठन ने भारत के खिलाफ विद्रोह छेड़ा था और 1990 तक ये संगठन राज्य के भीतर एक बड़ा आकार ले चुका था। अलगाववादी कश्मीरियों को इस संगठन में भर्ती करन के साथ ही उन्हें आतंकी ट्रेनिंग दी गई।
पाकिस्तान की जमीन से कश्मीर में आतंक फैलाता रहा हिजबुल
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1990 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संबंध इस संगठन से रहे। भारत आरोप लगाता रहा है कि हिजबुल वो आतंकी संगठन है जिसे पाक ने पाल-पोसकर बढ़ा किया है। हिजबुल के आतंकियों के प्रशिक्षण के लिए पाक की जमीन का इस्तेमाल होता रहा है।
हालांकि भारत के इस आरोप को पाकिस्तान हर बार नकारता रहा है। हिजबुल का निशाना वो सभी लोग हैं जो घाटी में शांति कायम करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
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इनमें भारतीय सेना के जवान और सशस्त्र सुरक्षाबलों को ये टेररिस्ट अपना निशाना बनाता रहा है। संगठन ने घाटी में कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। 1990 के दशक में हिजबुल का करीबी संबंध अफगानिस्तान से भी रहा। जहां संगठन के लड़ाकों की ट्रेनिंग कराई जाती थी। बाद में इन ट्रेनिंग कैंपों को तबाह कर दिया गया।
भारतीय फौजों की कब्रगाह बना देगा
हिजबुल मुजाहिद्दीन पाकिस्तान की सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक दल जमाल-ए-इस्लामी की आर्म्ड विंग है। संगठन के सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने के बाद US ने अमेरिकी लोगों का सलाहुद्दीन के साथ किसी तरह का वित्तीय लेनदेन करना प्रतिबंधित कर दिया।
अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर 2016 में कहा था कि हिजबुल के चीफ ने कश्मीर समस्या के किसी भी शांतिपूर्ण समाधान को रोकने की कसम खाई थी। सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह के नाम से भी पहचाने जाने वाले सलाहुद्दीन ने कश्मीरियों को आत्मघाती हमलावर के तौर पर प्रशिक्षण देने की धमकी दी थी। उसने कहा था कि वह कश्मीर घाटी को भारतीय फौजों की कब्रगाह बना देगा।
सलाहुद्दीन के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में हुई कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली। इसमें अप्रैल 2014 में हुए हमले भी शामिल हैं। इन हमलों में 17 लोग घायल हुए थे। 2001 में संगठन के क्षेत्रीय नेता माजिद डार ने कश्मीर में विद्रोह पर रोक लगाने की घोषणा कर दी थी। इस बड़े झटके के बाद संगठन का प्रमुख सैय्यद सलाहुद्दीन सकते में था।
2010 में बुरहान बना कश्मीर में आतंक का चेहरा
बुरहान ने 16 साल की उम्र में आतंक का रास्ता अपना लिया था। घाटी स्थित आतंकी संगठन हिजबुल के संपर्क में आने के बाद बुरहान को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा गया। सुरक्षा बलों के लिए मन में गहरी नफरत रखने वाला यह आतंकी 2010 में हिजबुल में शामिल हुआ था।
वापस कश्मीर आकर बुरहान ने घाटी के युवाओं को फुसलाकर आतंक के रास्ते पर लाना शुरु कर दिया। एक के बाद एक कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के चलते यह जल्दी ही आतंक का आका बन गया। आतंक के मौजूदा दौर में यह कश्मीर का मोस्ट वांटेड आतंकी था।
बुरहान वानी पाकिस्तान में बैठे हिजबुल के आकाओं के इशारों पर न चलते हुए अपना अलग ही दबदबा कायम करना चाहता था, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा।
हिजबुल छोड़कर घाटी में आतंक का चेहरा बना मूसा
zakir musa
जहां लगातार कश्मीर में आतंक की आग भड़काने वालों के सफाए का अभियान सुरक्षाबलों ने छेड़ रखा है। वहीं कभी हिजबुल के आतंकी संगठन का हिस्सा रहे जाकिर मूसा घाटी में आतंक की आग भड़काने का काम कर रहा है। कुछ दिन पहले ही वो पत्थरबाजों की मदद से सुरक्षाबलों के चंगुल से भाग निकला था।
हिजबुल मुजाहिद्दीन के पूर्व कमांडर और आतंकी जाकिर मूसा ने कश्मीर में अपना नया संगठन शुरू करने की बात भी कही थी । मूसा ने इस संगठन का नाम अंसार गजवत-उल-हिंद रखा है। गौरलतब है कि जाकिर मूसा ने कश्मीर में जिहाद और शरीयत को बढ़ावा दने की बात करता आया है। साथ ही अल कायदा के प्रति उसका लगाव भी जग जाहिर है।
जाकिर मूसा ने अल कायदा के नेटवर्क से 'फाउंडेशन ऑफ न्यू मूवमेंट ऑफ जिहाद इन कश्मीर' के नाम से अपना बयान जारी किया था। इस बयान में उसने आतंकि बुरहान वानी को शहीद बताया है। उसने कहा कि आज कश्मीर में जिहाद के जागने का समय आ गया है।
इसी साल बुरहान वानी की बरसी पर मूसा ने एक नया आडियो जारी किया था। इंटरनेट पर वायरल हुए इस ऑडियो टेप में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर जाकिर मूसा ने कश्मीर में जारी आतंक की लड़ाई को इस्लाम की लड़ाई करार दिया था। साथ ही जारी ऑडियों में मूसा ने कहा कि पिछले साल एनकाउंटर में मारे गए हिजबुल आतंकी बुरहान वानी ने अपनी जान देकर अल्लाह से वादा पूरा किया।
मूसा ने कहा था कि 8 जुलाई 2016 को शहीद बुरहान भाई, शहीद परेज भाई और सरताज भाई ने अल्लाह से अपना वादा पूरा किया और शहादत दी। उन्होंने बिना किसी लालच के ये रास्ता चुना था, बुरहान को हमेशा मुसलमानों की फिक्र रहती थी। हर वक्त जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों के बारे में सोचते थे।