केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को कहा कि भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में वृद्धि को बढ़ावा देगा और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्वदेशी तरीकों को तवज्जो दी जा रही है।
उन्होंने कहा, 2040 तक वैश्विक प्राथमिक ऊर्जा मांग में भारत की हिस्सेदारी मौजूदा 6 फीसदी से दोगुनी होकर 11 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही गैस की मांग भी तीन गुना हो जाएगी। यह बढ़ोतरी देश के मजबूत आर्थिक विकास के कारण होगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री प्रधान ने ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए गैस व तेल क्षेत्र का दृष्टिकोण 2030’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कहा, भारत कच्चे तेल का उचित और अनुकूल मूल्य निर्धारित करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने 2022 तक भारत के कच्चे तेल के आयात को 10 फीसदी तक कम करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
इस लक्ष्य को पाने के लिए स्वदेशी तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने देश के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की दिशा में चल रहे परिवर्तनकारी बदलाव की बात की। उन्होंने कहा, हम अपनी मौजूदा शोधन क्षमता को 250 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 450 एमएमटीपीए कर रहे हैं।
भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में बढ़ोतरी को बढ़ावा देगा, क्योंकि हमारी ऊर्जा खपत 2040 तक हर साल तीन फीसदी की गति से बढ़ने का अनुमान है, जो दुनिया की सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेज है।
उन्होंने देश के गैस आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ने, हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में चल रहे नीतिगत सुधार, ऊर्जा के नए और नवीकरणीय रूपों को विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने आदि को लेकर भी बात की। उन्होंने बाद में इस कार्यक्रम को लेकर ट्वीट भी किया।