नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में लोकतांत्रिक देशों को एकजुट रहना चाहिए। भारत और नीदरलैंड्स दोनों लोकतंत्र, कानून के शासन और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों में विश्वास रखते हैं, जो आज दबाव में हैं।
नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वान वील ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को मौजूदा वैश्विक हालात में बेहद अहम बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और ईयू के बीच चल रही बातचीत जल्द किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
बदलती दुनिया में एफटीए की अहमियत
भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए वान वील ने कहा कि आज के समय में, जब वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, 'समान सोच वाले साझेदारों' के साथ एफटीए पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गए हैं। उनके मुताबिक, कई देश तय नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, ऐसे में व्यापार को सुरक्षित, विविध और मजबूत बनाना जरूरी है। इस संदर्भ में भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं।
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भारत-ईयू एफटीए पर अंतिम दौर में बातचीत
इससे पहले, भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत और ईयू के बीच अब तक करीब 14 दौर की बातचीत हो चुकी है और दोनों पक्षों के बीच मतभेद लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर में ईयू की टीम भारत में पूरे हफ्ते रही और कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। अब बातचीत उस चरण में है, जहां बचे हुए अंतर को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
इंडो-पैसिफिक और रक्षा सहयोग
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों की चिंताएं मिलती-जुलती हैं, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर। वान वील ने बताया कि भारत और नीदरलैंड्स ने इंडियन ओशन पैसिफिक इनिशिएटिव में भी साथ काम करने का फैसला किया है। उन्होंने घोषणा की कि फरवरी में नीदरलैंड्स के नौसेना के डिप्टी चीफ भारत आएंगे और अगले साल वसंत ऋतु में एक डच युद्धपोत केरल के कोच्चि बंदरगाह पर आएगा। इसे भारत के साथ समुद्री सहयोग और क्षेत्र में मौजूदगी दिखाने का प्रतीक बताया गया।