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पेट्रोल-डीजल की बड़ी गाड़ियों और महंगे ई-वाहनों पर ही ब्रिटेन को मिलेगी छूट
समझौते के तहत ब्रिटेन की वाहन कंपनियों को भारत में सिर्फ बड़े पेट्रोल-डीजल और महंगे इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर ही शुल्क में रियायत मिलेगी। घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश कंपनियों की मध्यम-छोटी कारों और कम कीमत वाले ईवी पर शुल्क छूट नहीं दिया जाएगा। समझौते के पहले पांच साल में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को छूट नहीं दी जाएगी।
दोनों पक्षों के वाहन आयात पर शुल्क कोटा 10 फीसदी 10 हो जाएगा, जो वर्तमान में 110 फीसदी है। प्रस्तावित कोटा और शुल्क में छूट बड़ी इंजन क्षमता श्रेणियों (3,000 सीसी पेट्रोल/2,500 सीसी डीजल से ऊपर) पर अधिक है। घरेलू कंपनियों को अपने मजबूती वाले क्षेत्र छोटे (1,500 सीसी तक) और मध्यम श्रेणी (1,500-3,000 सीसी पेट्रोल/2,500 सीसी तक डीजल) में विस्तार, नवोन्मेष और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। शुल्क घटाकर 10 फीसदी करने का काम कोटा के साथ पांच वर्षों में किया जाएगा। कोटा से बाहर शुल्क में 50 फीसदी की कटौती 10 साल में की जाएगी।
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93.5 लाख से महंगे वाहनों को ही राहत
40,000 ब्रिटिश पाउंड (करीब 46.5 लाख रुपये) से कम कीमत वाले वाहनों के लिए कोई बाजार पहुंच नहीं प्रदान की गई है। इससे बड़े पैमाने पर बाजार में आने वाले इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को पूर्ण सुरक्षा मिलती है, जिसमें भारत वैश्विक नेतृत्व चाहता है। ईवी में बाजार पहुंच 80,000 ब्रिटिश पाउंड (करीब 93.5 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाले महंगे वाहनों के लिए दी गई है।
ब्रिटेन से होने वाला आयात 60% बढ़ने का अनुमान
ब्रिटिश अधिकारियों का अनुमान है कि इस समझौते के बाद लंबी अवधि में भारत को होने वाला ब्रिटेन का निर्यात लगभग 60 फीसदी बढ़ जाएगा। इसमें एक खरीद सेगमेंट भी शामिल होगा, जिससे ब्रिटिश कंपनियां भारत में केंद्र सरकार के स्तर पर सरकारी अनुबंधों के लिए बोली लगा सकेंगी। ब्रिटिश वित्तीय सेवा कंपनियों के साथ घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के समान व्यवहार किया जाएगा।