भारत और ब्रिटेन के बीच जल्द ही सोशल सिक्योरिटी यानी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा समझौता हो सकता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) का ही हिस्सा होगा। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन ने इस समझौते को लेकर सहमति दे दी है और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा के झंझट से राहत मिलेगी।
सामाजिक सुरक्षा समझौता एक ऐसा समझौता होता है, जिससे किसी देश में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को उस देश की सोशल सिक्योरिटी योजना में अलग से योगदान नहीं देना पड़ता। इससे उनके वेतन से कटौती नहीं होती और वहीं दूसरी तरफ उन्हें उस देश में काम करने की अवधि का लाभ पेंशन या अन्य सुविधा के रूप में मिलता है।
भारत ने अब तक 22 देशों से किए हैं ऐसे समझौते
फिलहाल भारत ने कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, स्वीडन, ब्राजील सहित 22 देशों के साथ सामाजिक समझौते किए हैं। इन देशों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को वही लाभ मिलता है, जो वहां के स्थानीय कर्मचारियों को मिलता है। अगर UK के साथ यह समझौता हो जाता है, तो भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
ऐसे जारी होगा सर्टिफिकेट ऑफ कवरेज
जो भारतीय कर्मचारी विदेश में पोस्टिंग पर जाते हैं, उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से 'सर्टिफिकेट ऑफ कवरेज' (सीओसी) लेना पड़ता है। यह सर्टिफिकेट दिखाकर वे यह साबित कर सकते हैं कि वे भारत में सामाजिक सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं और उन्हें विदेश में दोबारा योगदान नहीं देना पड़ेगा। इससे न केवल कर्मचारियों को फायदा होता है, बल्कि उनकी कंपनी भी दोहरा योगदान से बच जाते हैं।
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सभी नए एफटीए को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि सरकार भविष्य में जिन देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता करेगी, उनमें सामाजिक सुरक्षा समझौते को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे प्रवासी भारतीयों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
ब्रिटेन के साथ समझौते पर अंतिम मुहर जल्द
सूत्रों के मुताबिक, भारत और ब्रिटेन के बीच जो मुक्त व्यापार समझौता अंतिम दौर में है, उसमें सामाजिक सुरक्षा समझौते को लेकर सहमति बन चुकी है। इसकी जल्द औपचारिक घोषणा हो सकती है। इस समझौते से भारत से ब्रिटेन जाने वाले हजारों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
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दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी मजबूती
ऐसे में ये माना जा रह है कि इस कदम से न सिर्फ भारतीय प्रवासी कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत और ब्रिटेन के आपसी कारोबारी और सामाजिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। इसके अलावा इससे अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते करने में भारत को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत की 'वर्कफोर्स डिप्लोमेसी' को भी नई दिशा मिलेगी।