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पैकेज्ड फूड पर लगेगा लाल चेतावनी संकेत?: एफएसएसएआई ने दिया प्रस्ताव, लेबल पर ये जानकारी लिखना होगा अनिवार्य

Fri, 28 Aug 2026 09:52 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली
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खाद्य नियामक FSSAI। - फोटो : amarujala.com
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बाजार में मिलने वाले चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेटबंद स्नैक्स पर अब लाल रंग का चेतावनी लेबल दिख सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ऐसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की पैकेजिंग के सामने लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें चीनी, नमक या वसा की मात्रा अधिक है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पादों में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना और उन्हें सोच-समझकर विकल्प चुनने में मदद करना है।

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 सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफएसएसएआई की याचिका में कहा गया है कि चेतावनी लेबल पर जरूरत के अनुसार ‘हाई फैट’, ‘हाई शुगर’, ‘हाई साल्ट’ और/या ‘हाईली स्वीटेंड बेवरेज’ जैसी जानकारी दी जाएगी। इससे उपभोक्ता उन उत्पादों की आसानी से पहचान कर सकेंगे, जिनमें संबंधित पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच आया प्रस्ताव
एफएसएसएआई की ओर से यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में तब दिया गया है, जब स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर पश्चिमी देशों की तरह चेतावनी लेबल लगाने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में हुई सुनवाई के दौरान एफएसएसएआई से इन चेतावनी लेबल को लागू करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा था। बड़े खाद्य कंपनियां इस प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं। नेस्ले, पेप्सिको और कोका-कोला जैसी कंपनियों का मानना है कि इस कदम का असर बिक्री पर पड़ सकता है।
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लेबल लागू करने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य चेतावनी लेबल लागू करने में लंबे समय से हो रही देरी को लेकर एफएसएसएआई को फटकार लगाई थी। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा था कि नागरिकों, खासकर छोटे बच्चों को मोटापे जैसी बीमारियों के खतरे से बचाने के लिए पोषण संबंधी जानकारी में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वैधानिक नियामक की धीमी प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी जताई। न्यायाधीशों ने सवाल किया कि क्या नियामक संस्थाएं वास्तव में भारतीय आबादी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही हैं। अदालत ने कहा कि अगर कार्यपालिका स्वतंत्र रूप से कदम उठाने में विफल रहती है तो न्यायिक आदेश जारी किए जाएंगे।

व्यावसायिक हितों से ऊपर सार्वजनिक स्वास्थ्य
सुप्रीम कोर्ट ने उन दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि पैकेज के सामने चेतावनी लेबल लगाने से पारंपरिक भारतीय पैकेज्ड स्नैक्स पर अनुचित असर पड़ सकता है। पीठ ने कहा कि व्यावसायिक हितों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने नियामक संस्था को निश्चित ढांचा तैयार करने के लिए दो सप्ताह की सख्त समयसीमा दी है। पीठ ने यह भी कहा कि बच्चों और युवाओं को अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों की आक्रामक मार्केटिंग का सामना करना पड़ता है। उत्पादों के पैकेट पर स्पष्ट दृश्य चेतावनी नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ताओं के लिए उनके पोषण संबंधी जोखिमों का आकलन करना आसान नहीं होता।

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