राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना टीकाकरण की केंद्र सरकार की नई रणनीति के कारण अब भारत के ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम से कम समय में टीका मिल सकेगा। केंद्र अधिकतम लाभार्थियों को टीके का लाभ पहुंचाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इस साल 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण के पहले चरण में केवल स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को ही टीकाकरण का लाभ मिला। वहीं, 1 मार्च और 1 अप्रैल के दूसरे चरण में टीकाकरण को बीमार और 45 साल से ऊपर के लोगों पर केंद्रित रखा गया।
इन चरणों के दौरान सरकार शोध संस्थानों, निजी कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल से काम किया और देश में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत में वैक्सीन और दवा के नियामकीय प्रणाली में बड़ा बदलाव किया। इसके कारण आपात स्थिति में वैक्सीन के सीमित इस्तेमाल को भी मंजूरी दी गई।
सरकार ने टीकाकरण अभियान में शुरू से निजी क्षेत्र को भी शामिल किया। अब जबकि टीकाकरण की क्षमता और प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है, तो सरकारी और निजी क्षेत्रों में तेजी से इसे बढ़ाने का भरोसा हो गया है।
सरकार तीसरे चरण में राष्ट्रीय टीका रणनीति का उद्देश्य वैक्सीन की कीमत को उदार बनाना और टीकाकरण का दायरा बढ़ाना है। इसके तहत वैक्सीन निर्माता अपने मासिक दवा उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार को देगा और शेष 50 फीसदी वह राज्यों या खुले बाजार में बेचने को स्वतंत्र होगा।