जगदीप धनखड़, पूर्व उपराष्ट्रपति
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आज नहीं तो कल पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बोलेंगे। उनके सचिवालय सदस्य को भी किसी प्रेस कांफ्रेस में न सही, किताब में जरूर सच बाहर आने का भरोसा है। सूत्र का कहना है कि कोई बात साहब के दिल पर लग गई थी। इसके आगे मैं कुछ नहीं जानता। कांग्रेस से भाजपा में गए और कई दलों में रह चुके लोकसभा सांसद का कहना है कि धनखड़ से कोई इस्तीफा नहीं मांगा गया। पूर्व उपराष्ट्रपति पर उनका इगो भारी पड़ गया। राष्ट्रपति भवन पहुंचने से पहले थोड़ा इंतजार कर लेते तो ठीक था। सब सही हो जाता। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य का कहना है कि धनखड़ से इस्तीफा मांगा गया। उनका इस्तीफा दूसरे कार्यालय से टाइप होकर आया और उन्होंने केवल हस्ताक्षर किए हैं। अंत में बात एक पूर्व केंद्रीय मंत्री की। 76 साल के पूर्व केंद्रीय मंत्री कानूनी मामले के जानकार हैं। कहते हैं देश के संवैधानिक पद पर बैठे उपराष्ट्रपति से कोई जबरिया (यदि वह न देना चाहें) इस्तीफा नहीं ले सकता। दूसरी बात कोई भी सरकार अपनी ही पार्टी के चुने उपराष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग का प्रस्ताव लाती है क्या? पूर्व मंत्री का कहना है कि कोई तो बात थी। चार-पांच महीने से सब चल रहा था और कहीं का गुबार कहीं फूटा होगा। कोई बात दिल पर लगी होगी। अब यह सच तो कभी धनखड़ ही बताएंगे?
मुख्यमंत्री योगी क्यों आए थे दिल्ली?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली आते रहते हैं। लेकिन इधर उनकी यात्रा पर सभी की निगाह है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में कुछ बड़े कदम उठाना चाहते हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज सिंह भी रिटायर होने वाले हैं। योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का नया पूर्ण कालिक मुख्य सचिव चाहिए। राज्य में आ रही कुछ चुनौतियों से भी निबटने में उन्हें केंद्र से सलाह-मशविरा की आवश्यकता है। इसी तरह भाजपा अध्यक्ष के लिए सूत्रों का कहना है कि वो चेहरा चुना जाएगा जो संघ और संगठन को मजबूती देने के साथ-साथ सभी को साथ लेकर चल सके।
कौन बनेगा उपराष्ट्रपति?
इसका फैसला 26 जुलाई को प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद होगा। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग भी इस चुनाव की अधिसूचना जारी करने में दो दिन का समय ले सकता है। सत्ता पक्ष से चर्चा में कई नाम चल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी भी उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस के नेताओं को उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति का आगामी चुनाव काफी रोचक होगा। भाजपा के नेता सत्ता पक्ष की तरफ अब किसी संघ और भाजपा की पृष्ठभूमि वाले नेताओं का तर्क दे रहे हैं, लेकिन इस रेस में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का नाम सबसे आगे है। वैसे भी उपसभापति हरिवंश राज्यसभा में जदयू के जरिए आए थे, लेकिन अब उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य नेता काफी भरोसा रखते हैं।
बिहार, बंगाल से बदलेगा देश की राजनीति का पैमाना
भाजपा बिहार को लेकर संवेदनशील है। इस बार बिहार पर कांग्रेस भी बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रही है। खबर है कि तृणमूल की ममता बनर्जी भी परोक्ष रूप से बिहार की राजनीति में इंट्री लेने की तैयारी कर रही हैं। ममता की नजर असम में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी है। ममता को पता है कि 2026 में उनका फिर भाजपा से मुकाबला है। राजद के संजय यादव कहते हैं कि इस बार बिहार का घमासान रोचक होगा। बिहार से जो राजनीति की दिशा निकलेगी, वह पश्चिम बंगाल में हवा मजबूत करेगी। संजय ताना भी मारते हैं कि भाजपा बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी तो चाहती है, लेकिन उसके पास कोई मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है। जदयू के नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा का आईटी सेल पहले ही बीमार की श्रेणी में रख चुका है। बिहार में इस बार चिराग पासवान 243 उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बना रहे हैं। जबकि जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर अब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़कर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल की राह पर हैं।