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आईएनएस दूनागिरी से संशोधक तक: भारतीय नौसेना इस हफ्ते कोलकाता में तीन युद्धपोत कमीशन करेगी, जानें इनकी खासियत

Wed, 17 Jun 2026 03:52 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस,नई दिल्ली

सार

भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में एक साथ तीन युद्धपोत शामिल करने जा रही है। ये पोत सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण क्षमताओं को मजबूत करेंगे। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित कोलकाता यात्रा के दौरान आयोजित हो सकता है। 

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भारतीय नौसेना में जल्द तीन पोत शामिल होंगे। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय नौसेना इस सप्ताह के अंत में कोलकाता में एक साथ तीन युद्धपोतों (आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक) को शामिल करने जा रही है। यह देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी हो सकते हैं शामिल

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सूत्रों के अनुसार, समारोह में केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के शामिल होने की उम्मीद है। यह संभवत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता यात्रा के साथ ही आयोजित किया जाएगा। कोलकाता में होने वाला समारोह हाल के वर्षों में दूसरा ऐसा अवसर होगा जब तीन अग्रणी नौसैनिक प्लेटफार्मों को एक साथ कमीशन किया जाएगा। इससे पहले ऐसा आयोजन पिछले साल जनवरी में हुआ था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में विध्वंसक जहाज आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी और पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर को कमीशन किया था।

क्या है इसका खासियत?

  • INS दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A का पांचवां फ्रिगेट है।
  •  गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित इस श्रेणी का दूसरा फ्रिगेट है।
  • यह फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और निकटवर्ती हथियार प्रणालियों से लैस है।
  • यह संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है और इसमें एक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (ISM) शामिल है।

इस युद्धपोत को 80 महीनों में सौंप दिया गया, जबकि इससे पहले वाले युद्धपोत, आईएनएस नीलगिरी को तैयार होने में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट 17ए के दो और फ्रिगेट, आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस विंध्यगिरी, अभी कमीशन किए जाने बाकी हैं।

आईएनएस अग्रे के बारे में जानें

  • आईएनएस अग्रे, 2013 में स्वीकृत 16-जहाजों वाले अर्नाला-श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जलयान (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कार्यक्रम के तहत पांचवां पोत है।
  • तटीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए डिजाइन किया गया यह पोत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत सोनार प्रणालियों से सुसज्जित है।
  • यह प्लेटफार्म विशेष रूप से उथले तटीय जल में पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए तैयार किया गया है।
  •  एक ऐसी क्षमता जो पाकिस्तान नौसेना द्वारा अपनी पनडुब्बी बेड़े को मजबूत करने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो जाती है, जिसमें हैंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियों का शामिल होना भी शामिल है।


आईएनएस संशोधक, संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम पोत है।110 मीटर लंबा यह पोत लगभग 3,300 टन भार वहन करता है। स्वायत्त जलमार्ग वाहन (एयूवी), दूरस्थ रूप से संचालित वाहन (आरओवी) और समुद्र तल मानचित्रण और नौवहन चार्टिंग के लिए उपयोग की जाने वाली उन्नत जलवैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रणालियों से सुसज्जित है।

ये तीनों पोत मिलकर भारतीय नौसेना की सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियानों और जलवैज्ञानिक सर्वेक्षण में क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगे, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और परिचालन तत्परता में और वृद्धि होगी।

 

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