मुंबई में एक कारोबारी महिला गिरफ्तार होती है। उसे अपनी बेटी की हत्या के आरोप में जेल भेजा जाता है। एक-एक करके मामला खुलना शुरू होता है। धीरे-धीरे तथ्य सामने आना शुरू होते हैं और इसकी आंच दिल्ली व दक्षिण भारत के शहर शिवगंगा तक पहुंचती है।
हमारे देश के पूर्व वित्त और गृहमंत्री पी चिदंबरम के इर्द-गिर्द केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना शुरू हो जाता है। फिर एक दिन एक खबर तेजी से सुर्खियां बटोरने लगती है कि "देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम गिरफ्तार हुए।" यहां से शुरू होती है आईएनएक्स मीडिया कंपनी, पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के रिश्तों की कहानी।
शिवगंगा से संसद तक: पी चिदंबरम
बात 80 के दशक की है, जब तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से एक व्यक्ति चुनाव जीतकर संसद पहुंचता है। समय के साथ उसके नाम के आगे बहुत सारे पद जुड़ते चले जाते हैं। हिंदुस्तान की राजनीति का पन्ना आज उसके संबोधन से पहले लिखता है पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम। राजीव गांधी के नेतृत्व में उन्होंने साल 1984 में पहला चुनाव लड़ा, जीता और सरकार में शामिल किए गए। जब उन्होंने अपना पहला बजट पेश किया तो उसे ड्रीम बजट की उपाधि दी गई और वो सुर्खियां बटोरने लगा। मगर आज फिर से इस नाम के साथ टेलीविजन से लेकर अखबारों में कुछ नई सुर्खियां चल रही हैं, "आईनेक्स मीडिया केस और चिदंबरम।" बोतल में बंद जिन्न फिर से बाहर निकल आया है और अब सीबीआई से लेकर देश के प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा चिदंबरम बाबू पर कसने लगा।
अदावत से अदालत तक का पूरा किस्सा
बिना सजावट और बनावट के हम आपको बताते हैं कि कैसे कांग्रेस का कद्दावर नेता, माहिर वकील और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम फंस गए और ये मामला है क्या?
बात ऐसी हैं कि बतौर वित्त मंत्री जब उन्होंने कार्यभार संभाला और कुछ फैसले ऐसे भी लिए, जो आज मुसीबत बनकर सामने आ गए हैं। 20 अगस्त को आईनेक्स मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह "क्लासिक केस ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग" है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत ने आपको संरक्षण दिया मगर इस मामले को लेकर जितने भी सवाल आपसे पूछे गए उनके जवाब में आपने टालमटोल किया। इसलिए संवैधानिक संरक्षण खत्म किया जाता है। इसके साथ शुरू हो गई चिदंबरम के वकीलों की दौड़भाग और उनकी खुद की मुसीबतें। अब आलम ये है कि सीबीआई हो या ईडी, सब दिन-रात इस मामले की फाइल्स का हर पन्ना पलट रहे हैं।
इस बात के कोर्ट के बाहर आते ही मीडिया के कैमरे चिदंबरम के घर पर जूम होने लगे और सीबीआई की गाड़ियों की गश्त उनके घर के बाहर बढ़ गई। वक्त का पलटवार देखिए, जो एजेंसी कभी चिदंबरम बाबू का हुक्म बजाती थीं वो उन्हें गिरफ्तार करने पर आमादा हो चुकी थीं।
क्या है आईनेक्स मीडिया केस और क्यों पड़ी है सीबीआई चिदंबरम के पीछे?
अन्ना मलाई यूनिवर्सिटी... इस नाम को परिचय की जरूरत नहीं, जानते है इसके संस्थापक कौन थे? ये चिदंबरम के नाना सर सत्तप्पा मुथैय्या अन्ना मलाई ने बनवाई थी। चिदंबरम एक प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। 19 और 20 सदी के मशहूर बैंकर्स में थे सत्तप्पा मुथैय्या अन्ना मलाई | पढ़ने-लिखने में पी चिदंबरम भी कम नहीं थे। उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की और फिर हॉर्वर्ड से मैनेजमेंट की तालीम भी हासिल की। आपको अगर एक किस्सा याद हो जब नरेंद्र मोदी चेन्नई गए थे तो उन्होंने एक तंज कसा था कि "वित्त मंत्री हॉर्वर्ड वाला हो या हार्ड वर्क वाला ये बताइए, देश के विकास के लिए क्या जरूरी है?
बतौर वित्त मंत्री अपने आखिरी बजट में चिदंबरम ने जवाब भी दिया था और कहा था "मेरी मां और हॉर्वर्ड ने मुझे हार्ड वर्क की कीमत सिखाई है।" इनकी पत्नी खुद भी पेशे से वकील हैं और बेटा कार्ति चिदंबरम, अपनी एक कंपनी चलाते है जिसका नाम हैं "चैस मैनेजमेंट सर्विस लिमिटेड।" यही कंपनी चिदंबरम की मुसीबातों की वजह भी है।
एक नजर लेखक चिदंबरम पर:
पेशे से वकील और मंझे हुए नेता पी चिदंबरम एक लेखक भी हैं। उन्होंने बहुत सी किताबें लिखीं और अपनी कलम से देश की अर्थव्यवस्था से लेकर मुल्क के तमाम मुद्दों पर जमकर बात रखी। कुछ किताबों का सफरनामा आज भी आपको किताबघर में नजर आ जाएगा।
- Right of Temple Entry 17 नवंबर 2008
- Standing Guard: A Year in Opposition 16 मार्च 2016
- Dwarpal (Hindi) 10 नवंबर 2016
- Undaunted: Saving the Idea of India 1 जनवरी 2019
- Speaking Truth to Power: My Alternative View 20 फरवरी 2018
- Fearless in Opposition: Power and Accountability 14 फरवरी 2017
- A View From The Outside 7 मार्च 2008
- Right of Temple Entry, 17 नवंबर 2008
- Rationale of Drug of Choice: A Comparative Analysis, 1 जून 2017
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक नज़र :कुछ हटकर , 24 अप्रैल 2008
आईनेक्स मीडिया केस और कार्ति चिदंबरम की कंपनी: रिश्ता रसूख के खेल का
साल 2007 में इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर ने मिलकर आईएनएक्स मीडिया कंपनी बनाई और यहीं से शुरू हुआ 305.36 करोड़ रुपये का खेल। आईनेक्स मीडिया कंपनी पीटर मुख़र्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी ने शुरू की थी। 2015 में "शीना बोरा मर्डर केस" सबकी जुबां पर था। बात ये थी कि मुखर्जी की इस कंपनी में 305 करोड़ का निवेश होना था इसके लिए FIPB (Foreign Investment Promotion Board) के पास अर्जी गई। इस अर्जी में कहा गया कि आईनेक्स मीडिया इस पैसे का 26 प्रतिशत आईनेक्स न्यूज में लगाएगा यानी आईनेक्स न्यूज डिवीजन खोलेगा। मगर अनुमति मिली 4.62 करोड़ की और बोला गया आईनेक्स न्यूज के लिए नया आवेदन दीजिये। मगर मामला तो फंसा क्योंकि पैसे तो पहले ही लिए जा चुके थे और कंपनी भी खुल चुकी थी। अब हुआ यूं कि अप्रूवल हुए पैसे के अलावा जो 300 करोड़ बचा उस पर पड़ने लगा आईटी का छापा।
तब पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी ने दिमाग लगाया और रसूख का इस्तेमाल किया। ये बिसात बिछाना शुरू की और पहुंच गए पी चिदंबरम के बेटे क्रांति चिदंबरम की कंपनी की सलाह लेने। उन्होंने चिदंबरम के बेटे की कंपनी को बकायदा सलाहकार कंपनी के तौर पर नियुक्त किया और इस मुसीबत से बाहर निकलने का रास्ता खोजने लगे। फर्म ने दोबारा अर्जी देने की सलाह दी और वो स्वीकार भी हो गई | उस अर्जी में क्या नियम था ये तो दो लोग ही जान सकते हैं एक पी चिदंबरम और दूसरे उनके बेटे।
आईएनएक्स मीडिया कंपनी बनने की पूरी कहानी
साल 2007 में इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर ने मिलकर आईएनएक्स मीडिया कंपनी बनाई और यही से शुरू हुआ 305.36 करोड़ रुपए का खेल। तारीख 31 मई 2007 को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) ने आईएनएक्स मीडिया को केवल 4.62 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की अनुमति दी। मगर आईएनएक्स मीडिया ने 305.36 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश हासिल कर लिए।इस पैसे में से आईएनएक्स मीडिया ने गलत तरीके से 26 फीसदी राशि आईएनएक्स न्यूज में लगा दी। 2010 में प्रवर्तन निदेशालय ने आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट कानून को तोड़ने के जुर्म में केस दर्ज कर लिया गया।
इस मसले पर 2017 में सीबीआई ने केस दर्ज कर की पूछताछ करना शुरू की। आईएनएक्स मीडिया ने मॉरिशस की डनअर्न इन्वेस्टमेंट, एनएसआर-पीई और न्यू वरनॉन प्राइवेट लिमिटेड से 305 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया। फिर बिना FIPB की अनुमति के आईएनएक्स मीडिया ने आईएनएक्स न्यूज में 26 फीसदी पैसा लगाया। इंद्राणी और पीटर मुखर्जी ने हर कदम नई बिसात बिछाना शुरू किया।
कुछ तारीखें और मुसीबतों का जकड़ता शिकंजा
- 15 मई को सीबीआई और FIPB ने इस कंपनी को क्लीयरेंस देने में गड़बड़ी करने को लेकर केस दर्ज किया। यह माना गया कि पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए आईएनएक्स मीडिया ने 305 करोड़ रुपए विदेश से लिए।
- 16 जून को गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर एंड ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन ने कदम उठाया।
- 11 सितंबर को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कार्ति चिदंबरम के पास बहुत जगह ऑफ शोर प्रॉपर्टीज भी है और विदेशों से पैसे के लेन-देन के सारे जरूरी तथ्य हैं।
- 2018 को कार्ति चिदंबरम का सीए गिरफ्तार होता है।
- 21 अगस्त 2019 को पी चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया गया।
आईनेक्स मीडिया कंपनी की मुसीबत और चिदंबरम की फजीहत
15 मई 2017 को सीबीआई ने आईनेक्स मीडिया कंपनी को क्लीयरेंस देने के मामले में केस दर्ज किया। इसे मनी लॉड्रिंग का मामला माना गया। 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामला दर्ज कर लिया और इसी साल कार्ति चिदंबरम भी गिरफ्तार हुआ और 23 दिन तक कस्टडी में भी रहे। फिर क्या था, ये आग पी चिदंबरम के दामन तक भी पहुंच गई। 2018 को ही वो हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत भी ले आए और इस अग्रिम जमानत की मियाद को एक दो बार नहीं करीब बीस बार बढ़ाते रहे लेकिन 20 अगस्त को कोर्ट ने इन्हें झटका दे दिया और संवैधानिक संरक्षण समाप्त कर दिया।
फिर सिलसिला शुरू हुआ लुकछिपी का। कभी उनके वकील कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा तो सामने आते रहे पर पी चिदंबरम आसानी से सामने नहीं आये। किसी ने साल 2010 के किस्से की चर्चा की तब नरेंद्र मोदी केंद्र के निशाने पर थे और आज वो ही केंद्र है। किसी ने अमित शाह के सोहराबुद्दीन मामले का जिक्र किया तो किसी ने उनके पुराने रसूख का। मगर इसको वक्त की मार ही कहेंगे की एक वक्त मनी लॉन्ड्रिंग शब्द का इस्तेमाल करने वाले पी चिदंबरम आज खुद उस शब्द के लपेटे में खड़े हैं।
सोशल मीडिया पर घमासान
पी चिदंबरम का दामन आईएनएक्स मीडिया केस में क्या फंसा पार्टी से लेकर सत्ताधारी पार्टी तक सोशल मीडिया वॉर शुरू हो गया। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "नरेंद्र मोदी की सरकार चिदंबरम का चरित्र हनन करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और ‘बिना रीढ़ वाले मीडिया’ का इस्तेमाल कर रही है। ताकि चिदंबरम का चरित्र हनन किया जा सके और मैं सत्ता के इस शर्मनाक दुरुपयोग की निंदा करता हूं।" वही प्रियंका गांधी ने किया, पार्टी चिदंबरम के साथ हर वक्त खड़ी है और परिणामों की परवाह किए वो बिना सचाई के साथ खड़ी रहेगी। यह सिलसिला यही नहीं रुका। इसमें शशि थरूर, आनंद शर्मा से लेकर कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता ट्वीट रीट्वीट में लगे है और भाजपा भी जमकर जवाब दे रही हैं।
तिहाड़ जेल नंबर-7 का कैदी
दो दिन के राजनीतिक ड्रामा के बाद पी चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया और फिर शुरू हुआ तिहाड़ जेल नंबर 7 का सफर। इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब जज साहब ने जमानत को खारिज करते हुए कुछ शब्द इस मामले की कैटभ पर लिख दिए, सुनिए और जानिए कि इतना आसान नहीं होगा चिदंबरम बाबू का ये सफर...
दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को जमानत देने से इनकार कर दिया। चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार होने के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने उन्हें इस आधार पर जमानत नहीं दी कि हिरासत से बाहर होने की स्थिति में वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से केस से जुड़े गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। जस्टिस सुरेश कुमार कैट ने कहा कि आवेश में आकर हत्या की जा सकती है, लेकिन आर्थिक अपराध अक्सर सोच-समझकर, व्यक्तिगत हित के लिए और समाज-समुदाय के व्यापक हितों की अनदेखी करते हुए किया जाता है।
जस्टिस कैट ने अपने आदेश में सील कवर में दिए गए उन सबूतों और साक्ष्यों का भी हवाला दिया है, जिनके आधार पर सीबीआई ने 2017 के मई में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में विदेशों से फंड प्राप्त करने के संबंध में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को एमआईपीबी से मिली मंजूरी में अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाया गया है।
अदालत ने कहा कि सील कवर में दी गई जानकारियों के मुताबिक जांच के दौरान साफ हुआ है कि इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी (आरोपी) ने एफआईपीबी यूनिट के समक्ष आवेदन देने से पहले ही याचिकाकर्ता यानी चिदंबरम से मुलाकात कर ली थी। मुलाकात में याचिकाकर्ता ने उन्हें एफआईपीबी से स्वीकृति मिलने के बारे में आश्वस्त किया था। इस क्रम में पी चिदंबरम ने मुखर्जी दंपती से कहा था कि वे उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम, जो खुद भी इस मामले में आरोपी हैं, के व्यावसायिक हितों का ख्याल रखते हुए कुछ विदेशी लेनदेन उनके पक्ष में करें। आईनेक्स के किस्से ने तमाम किस्सा तमाम कर दिया, मगर ये जंग अभी लंबी है।