2014 के
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जनता ने पूर्ण बहुमत दिया। उस समय बीजेपी और पीएम मोदी की लहर ऐसी थी कि
भाजपा को रिकॉर्ड तोड़ 282 सीटें मिली थीं। लेकिन 2018 आते-आते भाजपा का भ्रम टूटने लगा और उनकी सीटें कम होती जा रही हैं। चार साल होते होते बीजेपी की सीटें 282 से घटकर 273 पर पहुंच गई हैं।
भाजपा को दो सीटों का झटका तो बुधवार को ही लगा। जिसमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद की फूलपुर सीट बीजेपी के हाथों से निकल गई। इन दोनों सीट पर बसपा समर्थित सपा ने जीत दर्ज की है। इन नतीजों ने 2019 में भाजपा के लिए मुश्किल भी खड़ी कर दी है।
बता दें कि 2014 में मोदी लहर जोरों पर थी। 2014 में हुए बीड और नरेंद्र मोदी की सीट वडोदरा में बीजेपी ने करीब 7 लाख और 3 लाख वोटों से उपचुनाव जीता था। माना जा रहा था कि मोदी लहर अभी बाकी है। लेकिन 2015 में इस लहर को झटका लगा। मध्य प्रदेश की रतलाम सीट बीजेपी ने कांग्रेस के हाथों गंवा दी।
5 लोकसभा उपचुनावों में यह लहर और हल्की पड़ गई
सपा, बसपा
साल 2017 और 2018 में हुए 5 लोकसभा उपचुनावों में यह लहर और हल्की पड़ गई। और बीजेपी ने गुरदासपुर, अलवर, अजमेर के साथ-साथ फूलपुर और गोरखपुर सीटें भी गंवा दीं। वहीं गुजरात चुनाव से ठीक पहले भाजपा सांसद नानाभाऊ पटेल ने गोंदिया-भंडारा लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। पटोले ने किसानों के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए पार्टी को छोड़ दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2014 से भाजपा ने अपनी 9 सीटें गवां दी हैं।
इन सीटों पर मिली हार
गोंडिया (महाराष्ट्र) इस्तीफा, पार्टी से नाराजगी, फूलपुर (यूपी) उपचुनाव में हार, गोरखपुर (यूपी) उपचुनाव में हार, अजमेर (राजस्थान) उपचुनाव में हार, अलवर (राजस्थान) उपचुनाव में हार, गुरदासपुर (पंजाब) उपचुनाव में हार, रतलाम (मध्यप्रदेश) उपचुनाव में हार, कैराना (उत्तर प्रदेश) सांसद का निधन, पालघर (महाराष्ट्र) सांसद का निधन।