ओडिशा में 1999 में आए सुपर साइक्लोन के खौफनाक दृश्यों को याद कर लोग आज भी सहम जाते हैं। 22 साल पहले आए तूफान में 10,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी, यहां तक कि राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई थी, लेकिन चक्रवाती तूफान यास से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इस तूफान से अबतक सिर्फ 6 लोगों की मौत हुई। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत ने आपदा जोखिम कमी (डीआरआर) में उल्लेखनीय प्रगति की है। तूफान यास को भी 2019 में आए अम्पाह तूफान की तरह माना जा रहा था, मौसम विभाग ने इसे ताकतवर और खतरनाक तूफान बताया था।
गौरतलब है कि 25 मई को चक्रवात यास ने ओडिशा और बंगाल में दस्तक दी थी, केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से होने वाली बड़ी तबाही को बचा लिया गया। तूफान से पहले ही बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और समय रहते हुए लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया। राहत और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, कोस्टगार्ड, सेना, वायुसेना और नौसेना की टीमें शामिल थी।
भारत आपदा चुनौती से निपटने में बना रोल मॉडल
सरकार ने पिछले एक दशक में आपदा जोखिम कमी (डीआरआर) को आर्थिक तौर पर मजबूत किया है। पिछले पांच सालों में औसतन 3-4 बिलियन डॉलर और दो वर्षों में 4 बिलियन डॉलर की मदद कर इसे सशक्त बना गया। उसके बाद से हर आपदा से मजबूती के साथ निपटा गया। सरकार की इस पहल को संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहा और भारत आज दुनिया में आपदा से निपटने में रोल मॉडल साबित हुआ है।
बंगाल और ओडिशा से 14 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
भयंकर चक्रवात यास के प्रकोप से बचने के लिए नौसेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और सीडीआरएफ की टीम ने बंगाल से आठ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया वहीं ओडिशा में 6 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया। इस तूफान को लेकर केंद्र भी नजर बनाए हुए था। खुद प्रधानमंत्री राज्यों के साथ अन्य विभागों से जुड़े अधिकारियों से संपर्क में बने हुए थे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने इसको लेकर दो बार बैठकें भी की थी।
ताउते तूफान से 193 लोगों की मौत
हालांकि पिछले हफ्ते आए ताउते तूफान से 193 लोगों की मौत हो गई थी, इनमें 70 लोगों की मौत तो मुंबई में समुंदर किनारे शिप (बार्ज पी-305) के डूबने से हुई थी। वहीं 25 मई को जब यास तूफान का लैंडफॉल हुआ तो सेना के 17 हेलीकॉप्टर, नौसेना के चार युद्धपोतों के अलावा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ 107 टीमें पूरी तरह से आपदा से निपटने के लिए तैयार थी। राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाया गया था, जिससे बड़े पैमाने पर होने वाली तबाही को रोका गया।