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India-Italy Ties: 'ईयू से मुक्त व्यापार समझौते से मजबूत होंगे भारत-इटली संबंध', इतालवी राजदूत बार्टोली का बयान

Sun, 18 Jan 2026 04:47 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

India-Italy Ties: इतालवी राजदूत ने भारत-इटली संबंधों को और मजबूत करने के लिए ईयू-भारत एफटीए को अहम बताया गया और कहा कि यह बदलते वैश्विक हालात में स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी देगा। राजदूत बार्टोली के अनुसार, इटली की औद्योगिक और तकनीकी विशेषज्ञता भारत के बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र को गति देगी। राजदूत बार्टोली ने और क्या कुछ कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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इतालवी राजदूत एंटोनियो बार्टोली - फोटो : एक्स/एंटोनियो बार्टोली
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विस्तार
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भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने भारत–इटली के मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ-भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा होने से यह साझेदारी और गहरी होगी।
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बार्टोली ने कहा कि आज के भू-राजनीतिक उथल-पुथल वाले दौर में यूरोप स्थिरता और अवसर प्रदान करता है। यूरोप की अर्थव्यवस्था जीवंत है और इसकी सभ्यता और संस्कृति भारत की प्राचीन विरासत से मेल खाती है। उन्होंने यूरोप–भारत मित्रता के तहत इटली को विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि एफटीए के पूरा होने से सहयोग और बढ़ेगा। बार्टोली ने कहा, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने 2025–2029 के लिए पांच वर्षीय कार्य योजना अपनाई है, जिसमें व्यापार और निवेश को कम से कम 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इनमें रक्षा, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, भारत-भूमध्यसागरीय गलियारा, तकनीक, स्टार्टअप, विज्ञान, उच्च शिक्षा, ऊर्जा और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रमुख क्षेत्र हैं। 

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उन्होंने कहा कि भारत मजबूत विनिर्माण क्षेत्र बनना चाहता है और यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति होने के नाते मशीनरी में इटली की विशेषज्ञता भारत के मजबूत होते विनिर्माण क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी है।
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ईयू–भारत एफटीए देगा नियामक सहयोग और पारदर्शिता को बढ़ावा
बार्टोली का यह बयान 27 जनवरी को होने वाले 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन से पहले आया है। इसके लिए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आ रहे हैं। इस एफटीए का उद्देश्य भारत और ईयू के बीच व्यापार को बढ़ाना है। ईयू पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2024–25 में वस्तु व्यापार 136.53 अरब डॉलर तक पहुंचा। इस समझौते में वस्तुओं की बाजार पहुंच, मूल नियम, सेवाएं, निवेश और बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल होंगे। भारत वस्त्र, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शून्य शुल्क की मांग कर रहा है। इसके साथ ही किसानों और लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए सुरक्षा प्रावधान भी होंगे। यह समझौता नियामक सहयोग और पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। 



 
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