नागरिकता कानून के विरोध के दौरान एक बार फिर फ्री कश्मीर का पोस्टर लहराया गया है। चेन्नई के वल्लुवर कोट्टम में शनिवार को सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन के दौरान 'फ्री कश्मीर' का प्लेकार्ड देखने को मिला। इसे लेकर विवाद छिड़ सकता है।
इससे पहले मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान भी एक महिला महक मिर्जा प्रभु फ्री कश्मीर का प्लेकार्ड लिए नजर आई थी। इस मामले में सोशल मीडिया पर उनका चौतरफा विरोध किया गया। बाद में महक पर केस भी दर्ज किया गया था।
मामला हाथ से निकता देख महक सोशल मीडिया पर आई और उन्होंने सफाई दी। उन्होंने वीडियों में कहा कि मेरा नाम महक है। मैं मुंबई में रहती हूं और मैं लेखक हूं। 'फ्री कश्मीर' पोस्टर पर मैंने कई प्रतिक्रियाएं देखी हैं।इस प्लेकार्ड की गलत व्याख्या की जा रही है। में गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंची। हम जेएनयू के छात्रों के समर्थन में नारे लगा रहा थे।
उन्होंने कहा कि मैनें देखा कि कुछ लोग प्लेकार्ड बना रहे हैं। वहां पर एनआरसी, सीएए और हर विषय पर प्लेकार्ड बन रहे थे। वहां पर एक प्लेकार्ड था जिस पर 'फ्री कश्मीर' लिखा था।मैं कश्मीरी नहीं हूं।मैं मराठी हूं लेकिन प्लेकार्ड को लेकर जो बातें कहीं जा रही हैं वे पूरी तरह से गलत हैं।