फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rafale: राफेल में जोड़ा गया लेजर गाइडेड रॉकेट, आसमान में नष्ट होंगे ड्रोन; आठ महीने में पूरी की गई परियोजना

Wed, 15 Jul 2026 05:30 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/पेरिस

सार

फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमान में 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट को सफलतापूर्वक एकीकृत कर ड्रोन रोधी क्षमता को मजबूत किया है। इस प्रणाली का उद्देश्य महंगी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के बजाय कम लागत वाले विकल्प के जरिए शाहेद जैसे ड्रोन का प्रभावी मुकाबला करना है। परियोजना को आठ महीने से भी कम समय में पूरा किया गया और जल्द ही इसका पहला बैच फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल को सौंपा जाएगा।
विज्ञापन
राफेल लड़ाकू विमान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फ्रांस ने अपने उन्नत लड़ाकू विमान राफेल में 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट को जोड़ने में सफलता हासिल की है। कम कीमत वाले इस हथियार को ड्रोन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए विकसित किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बिना पायलट वाले हवाई खतरों के तेजी से बढ़ने के कारण वायु सेनाएं हवा से हवा में मार करने वाली महंगी मिसाइलों के सस्ते विकल्प तलाश रही हैं।
विज्ञापन


इस कार्यक्रम को एलएडीएसी के नाम से जाना जाता है। इसे फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना को ड्रोन के खिलाफ एक सस्ती व असरदार क्षमता प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। फ्रांस के आयुध महानिदेशालय (डीजीए) की तरफ से फ्रांसीसी मीडिया को जारी बयान के अनुसार, इस एकीकरण के काम को फ्रांसीस वायु एवं अंतरिक्ष बल के सेंटर डी एक्सपर्टीज एरियैन मिलिटेयर (क्रीम) के साथ मिलकर किया गया। इसमें दासौ एविएशन और थेल्स का सहयोग मिला। हालांकि, फिलहाल इसकी कीमत की घोषणा नहीं की गई है।

डीजीए ने 7 जुलाई, 2026 को राफेल लड़ाकू विमान पर 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट के एकीकरण जांच अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। अनुबंध के बाद इसे आठ महीने से भी कम समय में पूरा किया गया। द वॉर जोन (टीडब्ल्यूजेड) की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीए ने कहा कि लॉन्चर पॉड्स, लेजर गाइडेड रॉकेट और एलएडीएसी मोड वाले टैलोइस लेजर डेजिग्नेशन पॉड्स का पहला बैच जुलाई के आखिर से फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल को मिलना शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन


शाहेद ड्रोन के मुकाबले फ्रांसीसी मिसाइलों की कीमत ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर 2025 में फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल के प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर ने ईरान के शाहेद-136 जैसे लंबी दूरी के एकतरफा अटैक ड्रोन का मुकाबला करने के लिए राफेल और मिराज 2000डी पर लेजर-गाइडेड रॉकेट लगाने का आदेश दिया था। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि एक फ्रांसीसी एमआईसीए मिसाइल की कीमत लगभग 20 लाख डॉलर है जबकि शाहेद ड्रोन की कीमत लगभग 50 हजार डॉलर है। राफेल के उन्नत होने का भारत को सीधा फायदा मिलेगा।

अमेरिका लड़ाकू विमानों में लगा चुका है ऐसे रॉकेट
अमेरिका पहले ही एफ-15ई, एफ-16 और ए-10 जैसे लड़ाकू विमानों में 70मिमी एपीकेडब्ल्यूएस लेजर  गाइडेड रॉकेट लगा चुका है। इनका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए किया गया।

भारत भी कर रहा है राफेल विमानों का इस्तेमाल
भारत ने साल 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का सौदा किया था। ये सभी विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा चुके हैं। भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने फ्रांस को 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का अनुरोध भेजा है। मेक इन इंडिया के तहत इनमें से ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। ऐसे में इन लड़ाकू विमानों के उन्नतीकरण का भारत को बड़ा लाभ मिलने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें