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भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता : रक्षामंत्री पार्ली ने कहा- गंगा और सीन नदी की घट गईं दूरियां, चीन और पाक को दिया साफ संदेश

Sat, 18 Dec 2021 06:34 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने भारत को वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता में अपना भागीदार बताते हुए कहा यह रिश्ता इतना प्रगाढ़ हो चुका है कि गंगा और सीन नदी के बीच की दूरी घटी हुई महसूस होती है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता व शांति में भारत की भूमिका की सराहना की। साथ ही आतंक की व्यापक चुनौती व हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को खतरा बताते साफ संदेश भी दिया।
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फ्रांस रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली और राजनाथ सिंह - फोटो : twitter@rajnathsingh
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विस्तार
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फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने भारत को वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता में अपना भागीदार बताते हुए कहा कि भारत और फ्रांस मजबूत सिद्धांतों और नियमों से संचालित वैश्विक व्यवस्था में यकीन रखते हैं। दोनों का जुड़ाव दो देशों से ज्यादा यहां के लोगों द्वारा साझा किए जाने वाले मूल्यों पर आधारित है।

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पार्ली ने कहा, यह रिश्ता इतना प्रगाढ़ हो चुका है कि गंगा और सीन नदी के बीच की दूरी घटी हुई महसूस होती है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता व शांति में भारत की भूमिका की सराहना की। साथ ही आतंक की व्यापक चुनौती व हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को खतरा बताते साफ संदेश भी दिया।

पार्ली दो दिन की भारत यात्रा पर बृहस्पतिवार शाम दिल्ली पहुंची। शुक्रवार को उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीसरी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता में भाग लिया। बैठक में शामिल होने से पहले वे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंची और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन ने ट्वीट कर मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच बहुध्रुवीय व्यवस्था बनाने, कानून के शासन की रक्षा करने व वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए फ्रांस भारत को एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखता है। वहीं, पीएम से मुलाकात के दौरान  पार्ली ने उन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस व यूरोपीय संघ की रणनीति की विस्तार से जानकारी दी।
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बैठक में अफगानिस्तान व  हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रमकता पर चर्चा हुई। दोनों देश आतंकवाद से निपटने पर भी सहमत हुए। वार्ता के बाद राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। मेरी फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली के साथ एक बेहतरीन बैठक हुई।

सीन नदी के जरिए जोड़ा रिश्ता
पार्ली ने फ्रांस की प्रमुख नदी सीन के जरिये भारत से रिश्ता जोड़ा। लगभग 778 किमी इस नदी के किनारे ही राजधानी पेरिस स्थित है। पार्ली ने फ्रांस और भारत के प्रगाढ़ होते संबंधों का हवाला दोनों देशों की प्रमुख नदियों के जरिये दिया। पार्ली ने एक थिंक-टैंक से बातचीत में कहा कि वह यह बताने के लिए भारत आई हैं कि फ्रांस और भारत के बीच दोस्ती कितनी खास है। कहा कि भारत जैसा कोई और नहीं है। पार्ली ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हमें भारत से बहुत कुछ सीखना है, जो पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए दृढ़ है। 

मेक इन इंडिया पर विस्तार से हुई चर्चा

राजनाथ व पार्ली के बीच बैठक में मेक इन इंडिया पहल से फ्रांस की कंपनियों के जुड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। वैश्विक बाजार में भारत की मौजूदगी को अहम बताते हुए पार्ली ने कहा कि फ्रांस भारत की जरूरतों को समझता है और मेक इन इंडिया पहल के लिए प्रतिबद्ध है।  

भारत को और राफेल देने को तैयार फ्रांस
फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारत को जरूरत पड़ी, तो फ्रांस अतिरिक्त राफेल मुहैया कराने को तैयार है। उन्होंने कहा, भारत-फ्रांस जैसे रणनीतिक साझेदार देशों की वायुसेनाओं के एक ही जैसे युद्धक विमान इस्तेमाल करने से उनकी वास्तविक ताकत दिखती है। हम तमाम नई संभावनाओं की गुंजाइश देख रहे हैं।
भारत की यात्रा पर आईं पार्ली ने यह टिप्पणी अनंता सेंटर थिंकटैंक के लिए फ्रांस में भारत के पूर्व राजदूत रहे डॉ. मोहन कुमार के साथ चर्चा के दौरान की।

भारतीय नौसेना में दूसरे विमान वाहक पोत के शामिल करने पर पार्ली ने कहा, हम जानते हैं कि विमानवाहक पोत जल्द सेवा में आने वाला है। उसके लिए विमानों की जरूरत होगी। अगर भारत फैसला करता है, तो हम पोत आधारित युद्धक विमान भी मुहैया करने को तैयार हैं।  भारत में निर्मित पहले विमान वाहक पोत विक्रांत को अगले वर्ष अगस्त में भारतीय नौसना में शामिल करने की योजना है। भारतीय नौसेना इसके लिए 57 लड़ाकू विमानों की तलाश में है और राफेल प्रमुख दावेदारों में से एक है।
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36 और राफेल के सौदे पर चल रही बातचीत

बृहस्पतिवार को फ्रांस के दूतावास ने बताया कि सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच हुए 59 हजार करोड़ रुपये के 36 राफेल लड़ाकू विमानों के अंतर सरकारी के तहत 33 राफेल की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अलावा 36 और राफेल के सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है। बीते दो दशक में रूस के सुखोई विमानों के बाद राफेल की खरीद भारत की तरफ से किया गया सबसे बड़ा युद्धक विमान अधिग्रहण सौदा है।

चीन की आक्रामकता समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा
पार्ली ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रमकता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में अंतराष्ट्रीय नौवहन को बाधित करने का प्रयास किया है, जबकि फ्रांस इसे मुक्त बनाए रखने के पक्ष में खड़ा है। इसी वजह से 2021 में फ्रांस ने अपने मुख्य भूभाग से 15,000 किलोमीटर दूर आठ माह तक हिंद महासागर, हिंद-प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक बेड़े तैनात किए हैं। कोई भी देश बलपूर्वक दुनिया से नौवहन की स्वतंत्रता नहीं छीन सकता।
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