राजनाथ व पार्ली के बीच बैठक में मेक इन इंडिया पहल से फ्रांस की कंपनियों के जुड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। वैश्विक बाजार में भारत की मौजूदगी को अहम बताते हुए पार्ली ने कहा कि फ्रांस भारत की जरूरतों को समझता है और मेक इन इंडिया पहल के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत को और राफेल देने को तैयार फ्रांस
फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारत को जरूरत पड़ी, तो फ्रांस अतिरिक्त राफेल मुहैया कराने को तैयार है। उन्होंने कहा, भारत-फ्रांस जैसे रणनीतिक साझेदार देशों की वायुसेनाओं के एक ही जैसे युद्धक विमान इस्तेमाल करने से उनकी वास्तविक ताकत दिखती है। हम तमाम नई संभावनाओं की गुंजाइश देख रहे हैं।
भारत की यात्रा पर आईं पार्ली ने यह टिप्पणी अनंता सेंटर थिंकटैंक के लिए फ्रांस में भारत के पूर्व राजदूत रहे डॉ. मोहन कुमार के साथ चर्चा के दौरान की।
भारतीय नौसेना में दूसरे विमान वाहक पोत के शामिल करने पर पार्ली ने कहा, हम जानते हैं कि विमानवाहक पोत जल्द सेवा में आने वाला है। उसके लिए विमानों की जरूरत होगी। अगर भारत फैसला करता है, तो हम पोत आधारित युद्धक विमान भी मुहैया करने को तैयार हैं। भारत में निर्मित पहले विमान वाहक पोत विक्रांत को अगले वर्ष अगस्त में भारतीय नौसना में शामिल करने की योजना है। भारतीय नौसेना इसके लिए 57 लड़ाकू विमानों की तलाश में है और राफेल प्रमुख दावेदारों में से एक है।
बृहस्पतिवार को फ्रांस के दूतावास ने बताया कि सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच हुए 59 हजार करोड़ रुपये के 36 राफेल लड़ाकू विमानों के अंतर सरकारी के तहत 33 राफेल की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अलावा 36 और राफेल के सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है। बीते दो दशक में रूस के सुखोई विमानों के बाद राफेल की खरीद भारत की तरफ से किया गया सबसे बड़ा युद्धक विमान अधिग्रहण सौदा है।
चीन की आक्रामकता समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा
पार्ली ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रमकता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में अंतराष्ट्रीय नौवहन को बाधित करने का प्रयास किया है, जबकि फ्रांस इसे मुक्त बनाए रखने के पक्ष में खड़ा है। इसी वजह से 2021 में फ्रांस ने अपने मुख्य भूभाग से 15,000 किलोमीटर दूर आठ माह तक हिंद महासागर, हिंद-प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक बेड़े तैनात किए हैं। कोई भी देश बलपूर्वक दुनिया से नौवहन की स्वतंत्रता नहीं छीन सकता।