फ्रांस भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए उसने अपनी सीमाओं को खोल दिया है। इसके साथ फ्रांस ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है। फ्रांस ने 'टैलेंट' पासपोर्ट धारकों को आमंत्रित किया है।
इसके लिए मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि में सात फ्रांसीसी वीजा सेंटर केंद्र 17 अगस्त से चालू हो गए हैं। यहां भारतीय वीजा नियमों और कांसुलर टीमों की सुरक्षा का अनुपालन करते हुए चुनिंदा वीजा आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।
बीते एक महीने पहले ही भारत में नियुक्त फ्रांस के राजदूत एमैनुएल लेनेन ने कहा था कि उनका देश भारतीय छात्रों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और कोरोना वायरस महामारी खत्म होने के बाद वीजा देना शुरू किया जाएगा।
फ्रांसीसी दूतावास द्वारा 'फ्रेंच - भविष्य की भाषा' विषय पर आयोजित एक वेब सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, 'कोविड-19 से ठीक पहले हमने उच्चतर शिक्षा के लिये भारत से फ्रांस जाने वाले 10,000 छात्रों की संख्या का रिकार्ड बनाया था और हम कोविड-19 संकट खत्म हो जाने के बाद कई और कीर्तिमान बनाने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।'
राजदूत ने कहा था, 'भारतीय छात्रों का स्वागत है और अगले साल हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत से काफी संख्या में छात्र अध्ययन के लिये फ्रांस जाएं। जो कुछ जरूरी होगा हम करेंगे। इसका मतलब है कि शुरूआत में कुछ हफ्तों का ऑनलाइन अध्यापन हो, हम ऐसा करेंगे लेकिन मैं इस बारे में बहुत आश्वस्त हूं कि ऑनसाइट (फ्रांस में) अध्यापन बहुत जल्द बहाल हो जाएगा।'
उन्होंने कहा था, 'मैं बहुत आश्वस्त हूं कि बहुत जल्द हम भारत के मित्रों के लिये वीजा जारी करने जा रहे हैं। छह लाख से अधिक छात्र 6,000 अध्यापकों से फ्रेंच सीख रहे हैं। ऐसा इसलिए है कि दोनों देशों के बीच एक साझा इतिहास है।' राजदूत ने फ्रेंच को भविष्य की भाषा बताते हुए कहा था कि यह भारत जैसे देश में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है जो अपनी भाषाई विविधता के लिए और इसका सम्मान करने के लिए जाना जाता है।
बता दें कि सितंबर के अंत में लगभग 118 भारतीय छात्र फ्रांस जाने की तैयारी में हैं। क्योंकि ये सभी वहां के एक स्कूल में अंग्रेजी भाषा के सहायक हैं। फ्रांस में उच्च अध्ययन के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2014 में 3000 थी, जो 2019 में बढ़कर लगभग 10,000 हो गई है।