सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक रोगियों की दिक्कतें खत्म करने औैर उनकी मानसिक अस्पतालों से छुट्टी के लिए केंद्र को एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए कहा कि चूंकि यह मामला संविधान की समवर्ती सूची में है इसलिए केंद्र को नियम बनाने का अधिकार है।
एडवोकेट जीके बंसल की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया है।जनहित याचिका में कहा गया है कि यूपी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती 300 लोग ठीक होने के बावजूद घर नहीं भेजे जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग गरीब वर्ग के हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि उम्मीद है भारत सरकार हमें कोई ऐसी नीति तय करने में मदद करेगी, जो उन मानसिक रोगियों को अस्पताल से छुट्टी दिलाएगी, जो ठीक होने के बावजूद घर नहीं भेजे जा रहे हैं।
इससे पहले अदालत ने इस जनहित याचिका के आधार पर छह राज्यों को नोटिस जारी कर कहा था कि ठीक होने के बाद अस्पताल में जबरदस्ती रखे जा रहे 300 मरीजों को घर जाने दिया जाए। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, जम्मू-कश्मीर और मेघालय को नोटिस जारी कर पूछा गया था कि ठीक होने के बावजूद मानसिक रोगियों को घर क्यों नहीं भेजा जा रहा है।