करीब 16 साल पहले निलंबित किए गए एक सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन कांस्टेबलों को फिर से सेवा में बहाल कर दिया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को बताया कि ये चारों मुंबई के घाटकोपर बम ब्लास्ट मामले के संदिग्ध आरोपी ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में कथित हत्या के मामले में निलंबित किए गए थे। बहाल होने वाले पुलिसकर्मियों में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वझे भी शामिल हैं।
अधिकारी ने बताया कि सहायक पुलिस निरीक्षक वझे सहित चार पुलिसकर्मियों को 2004 में निलंबित किया गया था। उन पर यूनुस की हत्या और सबूतों को मिटाने सहित अनेक आरोपों में मामले चल रहे हैं। 1990 बैच के पुलिस अधिकारी वझे सहित चारों पुलिसकर्मियों को शुक्रवार को सेवा में बहाल किया गया। इसके बाद सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे, कांस्टेबल राजेन्द्र तिवारी, सुनील देसाई ने स्थानीय आर्म्स यूनिट में शनिवार को काम संभाल लिया। वहीं, कांस्टेबल राजाराम निकम को मोटर वाहन विभाग में तैनाती दी गई है।
उधर, ख्वाजा यूनुस की हत्या के मामले में निलंबित पुलिसकर्मियों को बहाल किए जाने के खिलाफ सपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबु आसिम आजमी ने सोमवार को पार्टी कार्यालय में धरना देने की घोषणा की है।
2007 में इस्तीफा देकर वझे ने ले ली थी शिवसेना की सदस्यता
सचिन वझे ने नवंबर 2007 में पुलिस बल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनके खिलाफ जांच लंबित होने के कारण इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था। इस बीच 2008 में उन्होंने दशहरा रैली के दौरान शिवसेना की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। वझे प्रसिद्ध एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के मातहत के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने करीब 60 एनकाउंटर किए हैं।
पेशे से इंजीनियर था यूनुस, दुबई से लौटा था
महाराष्ट्र के परभणी का निवासी ख्वाजा युनूस (27) पेशे से इंजीननियर था और दुबई में काम करता था। उसे दिसंबर, 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट मामले में हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि यूनुस को पूछताछ के लिए औरंगाबाद ले जाते समय वह फरार हो गया था। लेकिन बांबे हाईकोर्ट के आदेश पर सीआईडी जांच में पता चला कि उसकी पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। जांच में 14 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन मुकदमा केवल वझे, तिवारी, निकम और देसाई पर ही चलाया गया। अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने सत्र अदालत को बताया था कि यूनुस को लॉकअप में कपड़े उतारकर बेल्ट से छाती और पेट पर पीटा गया था।