देश की चार बड़ी दवा कंपनी सिप्ला, जुबिलेंट लाइफ साइंसेस, हेटेरो और मायलैन ने कोरोना वायरस की संभावित दवा रेमडेसिविर को बनाने के लिए गिलीड साइंसेस के साथ गैर-विशेष लाइसेंसिंग समझौता किया है।
इस समझौते के तहत इन सभी कंपनियों को दवा के विनिर्माण और वितरण का अधिकार मिलेगा।
इस दवा को कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में तुरंत इस्तेमाल करने की अमेरिका के दवा नियामक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने स्वीकृति दी है।
गिलीड की तरफ से दिए गए बयान के मुताबिक, ‘‘गिलीड ने भारत और पाकिस्तान की पांच जेनेरिक दवा कंपनियों के साथ गैर-विशेष स्वैच्छिक लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस समझौते का मकसद रेमडेसिविर की आपूर्ति को बढ़ाना है।’’
इस दौरान कंपनी की तरफ से दिए गए बयान में कहा गया, ‘‘यह समझौता सिप्ला लिमिटेड, जुबिलेंट लाइफ साइंसेस, हेटेरो और मायलैन और फिरोजसंस लेबोरेटरीज के साथ किया गया है। ये कंपनियां रेमडेसिविर का विनिर्माण और 127 देशों में वितरण करेंगी।’’
बता दें कि फिरोजसंस लेबोरेटरीज पाकिस्तान की कंपनी है। वहीं, सिप्ला लिमिटेड, जुबिलेंट लाइफ साइंसेस, हेटेरो और मायलैन ये सभी भारतीय कंपनियां हैं।
गिलीड ने कहा, ‘‘ लाइसेंसिंग समझौते के तहत इन कंपनियों को रेमडेसिविर के लिए गिलीड की विनिर्माण प्रक्रियाओं की प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की जाएगी। इसके चलते इन कंपनियों के पास इसे बदलने का भी हक होगा। इससे उत्पादन को बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।’’
इसके अलावा एक और फायदा होगा कि दवा का उत्पादन करने वाली कंपनियां अपने जेनेरिक उत्पाद की कीमत खुद तय कर सकेंगी।