नोटबंदी के बाद से तमाम लोग मुसीबत से घिरे हैं लेकिन बुड्ढाखेड़ा के चार किसानों की परेशानी यह है कि उनके खातों में किसी ने 86 लाख से लेकर 88 लाख ये डाल दिए हैं। अचानक खाते में इतनी रकम देखकर वह खुश कम, घबरा ज्यादा रहे हैं। किसानों को लग रहा है कि आयकर विभाग से बचने के लिए किसी ने अपनी रकम उनके खातों में डाल दी है।
किसान बिरालसी चौकी पर पहुंचे और मामले की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने मामला सहारनपुर जिले का बताकर पल्ला झाड़ लिया। किसान सेंट्रल बैंक पहुंचे, जहां उन्हें तसल्ली से घर बैठने की सलाह दी गई है।
चरथावल क्षेत्र के गांव बुड्ढ़ाखेड़ा सहारनपुर जनपद की सीमा से सटा हुआ है। यहां के सैकड़ों किसानों ने सूखा राहत के चेक आने पर जून 2015 में सहारनपुर के देवबंद थाना क्षेत्र के गांव अंबेहटा शेखा की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में बचत खाते खोले थे। गांव के किसान जनक सिंह ने बताया कि उसके खाते में 500 रुपये बैलेंस था। उसने मंगलवार सुबह 9.33 बजे शाखा अंबेहटा शेखा के सेंट्रल बैंक के खाता संख्या 3937409767 से ग्राहक सेवा केंद्र से सौ रुपये निकाले। उसको जब खाते के बैलेंस की स्लिप दी गई तो उसमें 86 लाख 97 हजार 545 रुपये 77 पैसे जमा देखकर वह भौचक्का रह गया।
यह खबर लगने के बाद उसके भाई शो सिंह ने भी एक हजार रुपये उसी केंद्र से निकाले तो उसके खाते में 88 लाख 91 हजार 833 रुपये 85 पैसे बैलेंस मिला। जनक सिंह ने बताया कि उसके बाद गांव के संजय और मोनी ने भी अपने खातों से मामूली रकम निकाली तो उनके खातों में भी 86 से 88 लाख रुपये का बैलेंस आने पर हड़कंप मच गया। यह खबर सुनकर गांव के काफी लोग केंद्र पर एकत्र हो गए। उसके बाद केंद्र संचालक ने अन्य किसानों का बैलेंस बताने से इनकार कर दिया। उसके बाद खाताधारक बैंक शाखा में गए।
उन्होंने शाखा प्रबंधक को प्रकरण से अवगत कराया। आरोप है कि प्रबंधक ने उन्हें इतने गंभीर मुद्दे पर भी पासबुक पूरी करने के बजाए 31 दिसंबर के बाद आने की बात कहकर चलता कर दिया। कुछ ग्रामीणों ने सलाह दी कि किसी ने अपना कैश उनके खाते में जमा करा दिया है, अब आयकर विभाग कार्रवाई करेगा। गांव वाले किसी कार्रवाई से बचने के लिए बिरालसी पुलिस चौकी पहुंचे, जहां उन्हें पुलिसकर्मियों ने देवबंद थाने का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया।
क्या कहते हैं ग्राहक सेवा केंद्र संचालक
बुड्ढ़ाखेड़ा गांव के अंकित कुमार का निकट के गांव सिमलाना के स्टेट बैंक आफ इंडिया का ग्राहक सेवा केंद्र है। वह गांव में भी खाते खोलता है। उनका कहना है कि जिन लोगों के खाते आधार कार्ड से लिंकप हैं, उनको फिंगर प्रिंट के आधार पर रोजाना 2500 रुपये का भुगतान दिया जा सकता है। यह जरूरी नहीं है कि खाता एसबीआई का ही हो। उनके बैलेंस की स्लिप पर खाते का नहीं, बल्कि आधार कार्ड का नंबर अंकित होता है। उन्होंने बताया कि उनकी आईडी से जो भी बैलेंस आएगा वह सही होगा।