निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा की तारीख मुकर्रर हो गई है। 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चारों दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं और 22 जनवरी को उन्हें फांसी दी जानी है। पटियाला हाउस कोर्ट से निर्भया के चारों दोषियों के डेथ वारंट जारी कर दिए गए हैं। बुधवार को जेल प्रशासन की ओर से दोषी मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को डेथ वारंट की कॉपी सौंप दी गई है।
जोशी-अभयंकर सिलसिलेवार हत्याओं में उन्होंने जनवरी 1976 और मार्च 1977 के बीच 10 हत्याएं की थीं। मामले में आरोपी सुभाष चंडक गवाह बन गया था। हत्यारे पुणे के अभिनव कला महाविद्यालय में वाणिज्यिक कला के छात्र थे। वे सभी नशे के आदी थे और दो पहिया वाहन सवारों से लूटपाट करते थे।
पहली हत्या 16 जनवरी 1976 को हुई थी। हत्या के शिकार हुए प्रसाद हेडगे कातिलों के सहपाठी थे। उनके पिता कॉलेज के पीछे एक रेस्तरां चलाते थे। हत्यारों ने फिरौती के लिए अपहरण किया था। इन कातिलों ने 31 अक्टूबर 1976 और 23 मार्च 1977 के बीच नौ और लोगों की हत्याएं की। ये लोग घर में घुसकर घरवालों को आतंकित कर महंगा सामान लूटते थे और फिर लोगों की हत्या कर देते थे। इस तरह की हत्याओं से समूचे महाराष्ट्र में दहशत छा गई थी।
सहायक पुलिस आयुक्त के तौर पर सेवानिवृत्त हुए शरद अवस्थी भी उस वक्त अदालत में मौजूद थे जब इन कातिलों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने बताया कि मुझे याद है कि जब आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई उस समय अदालत परिसर में भारी भीड़ थी। सजा सुनाए जाने के बाद चारों दोषियों को अदालत से बाहर ले जाया गया।