फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री गिरफ्तार: अनबिल महेश पर 100 करोड़ के स्कूल घोटाले का आरोप, जानें पूरा मामला

Mon, 26 Oct 2026 04:58 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, चेन्नई।

सार

तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी को कथित 100 करोड़ रुपये के स्कूल मान्यता घोटाले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि निजी स्कूलों से सरकारी मंजूरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूले गए। पुलिस ने कई ठिकानों पर तलाशी ली है और ईडी ने भी केस दर्ज किया है। आखिर इस मामले में पूर्व मंत्री की भूमिका क्या है और निजी स्कूलों से रकम कैसे जुटाई गई? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चेन्नई पुलिस ने तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी को कथित 100 करोड़ रुपये के स्कूल मान्यता घोटाले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निजी स्कूलों को सरकारी मान्यता, स्कूलों का स्तर बढ़ाने की मंजूरी और अन्य जरूरी अनुमतियां दिलाने के नाम पर स्कूल प्रबंधन से 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूली गई। मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सोमवार को केंद्रीय अपराध शाखा की टीम ने चेन्नई स्थित उनके अपार्टमेंट से उन्हें गिरफ्तार किया। मामले में पुलिस के साथ प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रहा है।

विज्ञापन


अनबिल महेश को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने सोमवार को अनबिल महेश पोय्यामोझी को गिरफ्तार किया। वह तमिलनाडु में स्कूल शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। पुलिस की टीम चेन्नई के अमिनजिकरई स्थित उनके अपार्टमेंट पहुंची और उन्हें हिरासत में लिया। यह कार्रवाई मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुई। मामला निजी स्कूलों को सरकारी मान्यता और दूसरी कानूनी मंजूरियां दिलाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे लेने से जुड़ा है। जांच में पूर्व मंत्री की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी से आरोप साबित नहीं होते हैं।

निजी स्कूलों से 100 करोड़ रुपये वसूलने का आरोप किस पर है?
यह मामला तमिलनाडु में निजी स्कूलों के संगठनों के महासंघ के सचिव डीसी एलंगोवन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बीटी अरसाकुमार और मुथुकुमार ने खुद को तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन का संस्थापक अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष बताया था। यह संगठन पंजीकृत नहीं था। आरोप है कि दोनों ने निजी स्कूलों के प्रबंधन से 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई। इसके बदले स्कूलों को स्थायी सरकारी मान्यता, स्कूलों का स्तर बढ़ाने की अनुमति और अन्य जरूरी मंजूरियां दिलाने का वादा किया गया था।
विज्ञापन


डीएमके के पार्टी फंड के नाम पर पैसे लेने का क्या आरोप है?
शिकायत के मुताबिक, स्कूल प्रबंधन से ली गई रकम को उस समय सत्ता में रही द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के पार्टी फंड में योगदान के नाम पर जुटाया गया था। आरोप है कि अरसाकुमार ने सरकारी अधिकारियों से संपर्क होने का दावा किया और स्कूल संचालकों को भरोसा दिलाया कि वह उनके संस्थानों के लिए जरूरी अनुमतियां दिलवा सकता है। इनमें नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय (डीटीसीपी) की मंजूरी भी शामिल थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वादे पूरे नहीं किए गए और रकम भी वापस नहीं लौटाई गई। ये आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं।

पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
केंद्रीय अपराध शाखा ने शुरुआत में अरसाकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया था। धारा 7 रिश्वत लेने या मांगने और धारा 12 अपराध में सहायता करने से संबंधित है। पुलिस ने अरसाकुमार को 27 जून को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर पूर्व मंत्री अनबिल महेश की भूमिका की भी पड़ताल शुरू हुई। 16 सितंबर को चेन्नई और तिरुचि में नौ स्थानों पर तलाशी ली गई। इनमें पूर्व मंत्री से जुड़े चार ठिकाने भी शामिल थे। इस दौरान कई दस्तावेज जब्त किए गए। 29 सितंबर को भी इसी मामले में तलाशी अभियान चलाया गया।

ईडी ने मामले में कब दर्ज किया केस?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित घोटाले से जुड़े मामले में एक अक्तूबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया था। इस कानून के तहत कथित अपराध से अर्जित धन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जाती है। अब मामले में पुलिस की जांच के साथ रकम के लेनदेन की भी पड़ताल हो रही है। पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के बाद जांच में उनकी कथित भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हालांकि, स्कूलों से रकम वसूलने, सरकारी मंजूरियां दिलाने और पूर्व मंत्री की भूमिका से जुड़े आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें