किसानों की ट्रैक्टर रैली में उत्पाद मचाने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कठोर कार्रवाई करेगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पुलिस आयुक्त कह चुके हैं कि लाल किला में ऐसा दुस्साहस बर्दाश्त नहीं करेंगे। आरोपियों पर बड़ा एक्शन होगा। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामलों के बाद किसान संगठनों के बीच ऐसी चर्चा सुनाई पड़ी है कि पंजाब के युवाओं के साथ राष्ट्रीय राजधानी में कुछ गलत होता है तो उसके दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
एक तरफ पाकिस्तान है तो दूसरी ओर अमेरिका, ब्रिटेन व कनाडा से खालिस्तान समर्थकों की धमकियां आ रही हैं। कथित तौर पर ये भी कहा जा रहा है कि कठोर कार्रवाई से कहीं पंजाब में अस्सी का दौर दोबारा न लौट आए। आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एवं कैबिनेट सचिवालय में सेक्रेटरी ‘सिक्योरिटी’ के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने कहा, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उसका गलत संदेश जाएगा। सरकार को इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर खालिस्तान समर्थकों और दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि भारतीय लोकतंत्र में लालकिला पर ऐसी हिमाकत करने वाले लोग बख्शे नहीं जाएंगे।
बता दें कि किसान आंदोलन के शुरू होते ही इस तरह की खबरें सुनाई पड़ी थीं कि वहां खालिस्तान समर्थकों की उपस्थिति बढ़ रही है। बाद में किसान संगठनों ने इस मामले में सफाई दी कि आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ दिन बाद अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से खालिस्तान समर्थक एवं सिख फॉर जस्टिस के संचालक गुरपतवंत सिंह पन्नू के ऑडियो मैसेज किसानों के बीच प्रसारित किए जाने लगे। यहां तक कि मीडिया कर्मियों को भी इस तरह के संदेश भेजे गए थे। गणतंत्र दिवस से पहले भी पन्नू ने धमकी दी थी कि लाल किला पर संगठन का झंडा फहराया जाएगा। परेड में व्यवधान डाला जा सकता है।
किसानों की ट्रैक्टर परेड में बहुत कुछ वैसा ही हुआ, जैसा पन्नू ने कहा था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जब एफआईआर दर्ज करनी शुरू की तो एक दूसरी चर्चा सामने आ गई। किसान संगठनों के बीच रहे लोगों ने साफतौर पर कहा, अगर पंजाब के युवाओं के खिलाफ कुछ गलत होता है तो उसकी चिंगारी दूर तक जाएगी।
पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने कहा, ये बड़ी चिंता का विषय है। पहली गलती तो सरकार की है। उसे गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली की इजाजत नहीं देनी चाहिए थी। किसान संगठन नहीं माने तो सरकार ने वह इजाजत दे दी। इसके लिए शर्तें तय की थीं। किसान नेताओं ने उन शर्तों के मुताबिक रैली निकालने का वादा किया था।
जब लाल किला पर ट्रैक्टर पहुंचने लगे तो किसान नेता भाग गए। कोई किसान नेता वहां उपद्रवियों को समझाने के लिए नहीं पहुंचा। चार सौ पुलिसकर्मी घायल हो गए। करोड़ों रुपये की पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई करने से सरकार डरे नहीं। इनकी जमकर खिंचाई की जाए। जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई भी इन्हीं संगठनों से करें। जब पाकिस्तान में तीन सौ ट्विटर हैंडल इस आंदोलन को उग्र बनाने के लिए सक्रिय थे तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अमेरिका में बैठा पन्नू भड़काता है कि वो लालकिला पर झंडा फहराने वाले को ढाई लाख यूएस डॉलर का ईनाम देगा। बतौर यशोवर्धन आजाद, सरकार किसी दबाव में न आए। उसे खालिस्तान की चिंता नहीं करनी चाहिए। अगर अब इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो उसका गलत संदेश जाएगा।