कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। दोनों पार्टियों के बीच बजट और कई सारे मुद्दों पर मतभेद शुरू हो गए हैं। हालांकि इस दौरान दोनों पार्टियां अपने आप को समायोजित करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार ने गठबंधन को लेकर कहा कि 'हमें एक साथ यात्रा करनी है। हमें अपने आप को समायोजित करना होगा। हम परिस्थितियों को जानते हैं और इसीलिए सिद्धारमैया को समन्वय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी अध्यक्षता में ही दोनों राजनीतिक दलों को सिस्टम चलाने की जरूरत है।
बता दें कि हाल ही में कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि उन्हें इस गठबंधन सरकार के कार्यकाल पूरे करने पर संदेह है। उन्होंने कहा था कि यह सरकार संसदीय चुनाव पूरे तक सुचारू रूप से चलती रहेगी, लेकिन उसके बाद गठबंधन सरकार के आगे बढ़ने पर संदेह है।
उधर, कांग्रेस और जेडीएस में मतभेद की खबरें मिलते ही भाजपा की ओर से हलचल तेज हो गई है। बेंगलुरु में आज भाजपा की अहम बैठक होनी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में जेडीएस और कांग्रेस के बीच मतभेदों की स्थिति पर चर्चा की जाएगी और उसके बाद पार्टी की आगे की रणनीतियों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा अगले साल होने वाले संसदीय चुनावों को लेकर भी नेताओं के बीच गहन मंथन होगा और रणनीति तैयार की जाएगी।
हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा ने ये साफ किया है कि कांग्रेस के साथ जेडीएस के मतभेदों के बावजूद दोनों पार्टियां एक साथ संसदीय चुनाव लड़ेंगी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि वो क्षेत्रीय पार्टियों को हल्के में ना ले। उन्होंने कहा कि छह विपक्षी पार्टियों के नेता मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे जो निश्चित तौर पर विपक्ष की एकजुटता को दर्शाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ें। कांग्रेस को इसपर विचार करना चाहिए।