शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे साल 1996 में ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन तत्कालीन शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे ने उन्हें यह अवसर नहीं दिया। दिवंगत बाल ठाकरे के अति करीबी पूर्व मंत्री सुरेश नवले ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि 18 साल पहले उद्धव की जो इच्छा अधूरी रह गई थी, साल 2019 में उन्होंने कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन कर वह पूरी की।
सुरेश नवले ने कहा कि महाराष्ट्र में साल 1995 में पहली बार भाजपा-शिवसेना युति सरकार बनी थी। उस समय शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री बनाया था जबकि भाजपा के गोपीनाथ मुंडे उप मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा-शिवसेना युति की सरकार में नवले ऊर्जा राज्यमंत्री थे। नवले का दावा है कि साल 1996 में उद्धव ठाकरे ने मुझे बुलाया और कहा कि बाला साहेब के पास जाओ और मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहो। इसके बाद मैं बाला साहेब ठाकरे से मिला और उनसे विनती की कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाएं। इस पर बालासाहेब ने पूछा कि क्या इसके लिए तुम्हे किसी ने भेजा है। लेकिन मैने यह नहीं बताया कि मुझे उद्धव ठाकरे ने भेजा है।
मनोहर जोशी के खिलाफ बगावत कर चर्चा में आए थे नवले
दो बार विधायक रहे नवले भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में मनोहर जोशी के खिलाफ बगावत कर चर्चा में आए थे। उसके बाद उन्होंने शिवसेना छोड़ कर अपनी अलग जनशक्ति पार्टी बनाई थी। पार्टी को चुनाव में असफलता मिली जिससे वह राजनीति में हाशिए पर चले गए थे। मौजूदा केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के कांग्रेस में शामिल होने पर नवले भी कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया। लेकिन जब राणे ने भाजपा का दामन थाम लिया तब भी नवले कांग्रेस मे ही बने रहे। अब शिवसेना में दो फाड़ होने पर नवले एकनाथ शिंदे गुट के साथ हैं।