झारखंड के प्रसिद्ध मार्क्सवादी नेता और धनबाद के पूर्व सांसद एके राय नहीं रहे। रविवार सुबह सेंट्रल अस्पताल में 90 की उम्र में अंतिम सांस ली।रॉय पिछले एक दशक से धनबाद से 17 किलोमीटर दूर पथाल्दिह इलाके में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर में रह रहे थे। इससे पहले वह यहां पुराना बाजार में टेम्पल रोड पर अपने पार्टी कार्यालय में रहे।
राय का जन्म सपुरा गांव में हुआ था जो कि अभी बांग्लादेश में है। उनके पिता शिवेंद्र चंद्र राय प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने 1959 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी पूरा किया और एक निजी फर्म में दो साल तक काम किया। बाद में, वह 1961 में पीडीआईएल सिंदरी में शामिल हुए।
वह झारखंड आंदोलन के संस्थापकों में से एक थे। धनबाद से तीन बार के सांसद झारखंड की क्षेत्रीय पार्टी मार्क्सवादी समन्वय समिति (एमसीसी) के संस्थापक भी थे। धनबाद से तीन बार के सांसद झारखंड की क्षेत्रीय पार्टी मार्क्सवादी समन्वय समिति (एमसीसी) के संस्थापक भी थे।
उन्होंने नौ अगस्त 1966 को बिहार बंद आंदोलन में भाग लिया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तत्कालीन सरकार का विरोध करने के कारण प्रोजेक्ट्स एंड डेवलेपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) प्रबंधन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
रॉय श्रमिक संघ में शामिल हुए और उन्होंने सिंदरी फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) और निजी कोयला खान मालिकों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। साल 1967 में उन्होंने माकपा की टिकट पर बिहार की सिंदरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए।हालांकि उन्होंने माकपा से इस्तीफा दे दिया और अपनी मार्क्सवादी समन्वय समिति बनाई।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सुप्रीमो शिबू सोरेन और पूर्व सांसद दिवंगत बिनोद बिहारी महतो के साथ, रॉय ने 1971 में बिहार से अलग राज्य की मांग करते हुए झारखंड आंदोलन शुरू किया। 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना।