Kerala: केरल में विधानसभा चुनाव से पहले माकपा के दो चर्चित चेहरे कांग्रेस के मंच पर नजर आए। अभिनेता प्रेम कुमार कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं, माकपा के वरिष्ठ नेता वीएस अच्युतानंदन के पूर्व निजी सलाहकार ए सुरेश कांग्रेस की यात्रा में शामिल हुए। पढ़ें पूरी खबर-
केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जाने-माने चेहरे कांग्रेस के मंच पर नजर आए। इस घटनाक्रम ने सबका ध्यान ऐसे समय में अपनी ओर खींचा है, जब राज्य में अहम विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं।
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अभिनेता और केरल चलचित्र अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रेम कुमार कोट्टयम के नागमपदम इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर नजर आए। 'संस्कार उत्सव 2026' कार्यक्रम को केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) की ओर से आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने करना था। लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रेम कुमार ने क्या कहा?
अपने संबोधन में प्रेम कुमार ने कहा कि वह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में आए हैं, न कि किसी राजनीतिक बैठक में।
उन्होंने रचनात्मक स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि एक कलाकार को 'असीमित स्वतंत्रता' मिलनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि लेखकों और कलाकारों की आवाज को धीरे-धीरे दबाया जा रहा है।
कुमार ने कहा कि कला अभिव्यक्ति का सबसे मजबूत माध्यम है और इसे दबाना फासीवाद की निशानी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज रंगमंच के कलाकारों को अपने विचार खुलकर रखने में कठिनाई हो रही है।
हाल ही में प्रेम कुमार ने राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था, जब उन्हें केरल चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष पद से हटाया गया।
कांग्रेस की यात्रा में शामिल हुए माकपा नेता के निजी सलाहकार
इस बीच, पलक्कड़ में माकपा के वरिष्ठ नेता वीएस अच्युतानंदन के पूर्व निजी सहायक ए. सुरेश ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली 'पुथुयुगा यात्रा' में हिस्सा लिया। यह यात्रा विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के नेतृत्व में निकाली जा रही है।
पलक्कड़ जिला यात्रा के समापन कार्यक्रम में वीडी सतीशन ने सुरेश का मंच पर स्वागत किया। भावुक होकर ए सुरेश ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह भारी दबाव में थे और उनका दर्द अब खत्म हुआ है। उन्होंने दावा किया कि वामपंथ अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है। सुरेश को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में वर्षों पहले माकपा से निष्कासित कर दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद वह मार्क्सवादी पार्टी के समर्थक बने हुए थे।