बंद हो चुकी जेट एयरवेज के एक पूर्व कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली है, जिसमें पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता देने का प्रावधान वाली सीआरपीसी की धारा 125 की वैधता को चुनौती दी गई है। पूर्व कर्मचारी ने याचिका में एयरलाइन बंद होने के चलते बेरोजगार होने का हवाला देते हुए कहा है कि वह खुद आजीविका के लिए संघर्ष कर रहा है, ऐसे में पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दे सकता है। उसने पत्नी पर आरोप भी लगाया है कि वह उच्च शिक्षित है फिर भी नौकरी न करके वह केवल उसका शोषण करना चाहती है।
इस मामले में पूर्व जेट एयरवेज कर्मी की ओर से उसके वकील एमएस विष्णु और श्रीराम पी ने सुप्रीम कोर्ट में 33 पेज की अर्जी दाखिल की है। इसमें उसने लिखा है कि नौकरी जाने के बाद सीआरपीसी की धारा 125 मेरे लिए अतिरिक्त बोझ की तरह है। मैं अदालत से इसे खत्म करने की मांग करता हूं। उन्होंने याचिका में इसे समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) के खिलाफ बताया।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि शैक्षिक योग्यता के नाम पर उसने केवल एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में डिप्लोमा किया है। जेट एयरवेज एयरलाइन बंद होने के बाद से उसके पास कोई रोजगार नहीं है। इसके बावजूद देहरादून फैमिली कोर्ट ने पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता देते रहने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने लिखा है कि उसकी पूर्व पत्नी अंग्रेजी समेत तीन विषयों में उच्च शिक्षित है और खुद जीवन यापन करने में समर्थ है, लेकिन वह केवल मेरा शोषण करना चाहती है।
17 अप्रैल को बंद हुई थी जेट एयरवेज
बता दें कि भारी आर्थिक संकट से जूझ रही जेट एयरवेज 17 अप्रैल को बंद हो गई थी। कंपनी बंद होने से इसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत 20 हजार से ज्यादा लोगों के भविष्य पर संकट छा गया है। वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर इसके संस्थापक फाउंडर नरेश गोयल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है।