भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने फुटबाल के मैदान में न जाने कितने प्रतिद्वंद्वियों को छका कर गोल किए होंगे, लेकिन राजनीतिक मैदान में उतरे भूटिया को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं सूझ रहा है। वैसे, बीते लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर दार्जिलिंग संसदीय सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी. लेकिन नाकाम रहे थे।
इस बार वह इसी पार्टी के टिकट पर दार्जिलिंग जिले की सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से मैदान में हैं। यहां उनका मुकाबला माकपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य से है। भट्टाचार्य इस सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं।
फुटबॉल प्रेमी बंगाल में भूटिया की लोकप्रियता पर किसी को भले शक नहीं हो लेकिन यह कहना मुश्किल है कि उनको चुनाव मैदान में इसका कितना फायदा मिलेगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस सीट पर माकपा की जीत लगभग तय है।
राजनीतिक टिप्पणीकार दिनेश मंडल कहते हैं कि भूटिया को भट्टाचार्य जैसे अनुभवी नेता के सामने नहीं उतरना चाहिए था। दूसरी ओर, भट्टाचार्य भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं और वह कहते हैं कि भूटिया अच्छे फुटबॉलर हैं, लेकिन वो अच्छे नेता नहीं हैं।