मुंबई से बारामती जा रहा एक चार्टर्ड विमान बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अजित पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी, एक फ्लाइट अटेंडेंट और दो क्रू मेंबर, जिनमें पायलट विदिप जाधव भी शामिल हैं। इस दुखद घटना के बाद विमान हादसे के कारणों को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। जिस पर अब पूर्व भारतीय वायुसेना पायलट की प्रतिक्रिया सामने आई है।
वायुसेना के पूर्व पायलट ने क्या बताया?
बारामती में हुए विमान हादसे पर पूर्व भारतीय वायुसेना (IAF) पायलट कैप्टन (सेवानिवृत्त) एहसान खालिद ने कहा है कि यह दुर्घटना खराब मौसम, तकनीकी खराबी या पायलट के फैसले में गलती के कारण हो सकती है। हालांकि उन्होंने जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दी है। पूर्व वायुसेना पायलट और हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमित कपूर के मित्र कैप्टन (रिटायर्ड) एहसान खालिद ने कहा कि सुमित कपूर एक अनुभवी पायलट थे और बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
'पहली असफल के बाद दूसरी बार लैंडिंग करनी पड़ी'
उन्होंने कहा, 'यह एक दुखद घटना थी। मैं पायलट को लगभग दो दशक पहले से जानता हूं। वह एक अनुभवी पायलट थे। मुझे बताया गया है कि विमान जब पहली बार लैंडिंग के लिए आ रहा था, तो उसे वापस लौटना पड़ा और दूसरी बार लैंडिंग करनी पड़ी। मुझे नहीं पता कि पहली लैंडिंग खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण रद्द की गई और लैंडिंग में चूक हुई, या विमान में कोई तकनीकी खराबी भी थी। मेरी जानकारी के अनुसार किसी भी तकनीकी खराबी की सूचना नहीं मिली है।'
मौसम की स्थिति पर कही ये बात
मौसम की स्थिति के बारे में विस्तार से बताते हुए खालिद ने कहा कि हालांकि आधिकारिक रिपोर्टों में दृश्यता को सीमांत यानी 'मार्जिनल' बताया गया है, लेकिन पायलट द्वारा अनुभव की गई वास्तविक स्थितियां अलग हो सकती थीं, खासकर बारामती हवाई अड्डे पर सीमित नेविगेशनल बुनियादी ढांचे को देखते हुए। उन्होंने खराब मौसम और तकनीकी समस्याओं या पायलट के निर्णय में त्रुटि को संभावित स्पष्टीकरण के रूप में बताया।
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उन्होंने कहा, 'मीडिया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, दृश्यता सीमांत थी। इसका मतलब है कि यह न तो बहुत अच्छी थी और न ही बहुत खराब। अगर यह वास्तव में खराब होती, तो पायलट लैंडिंग का प्रयास नहीं करता। सीमांत दृश्यता का अर्थ है कि स्थिति स्पष्ट नहीं थी, एक तरह की 'या तो उड़ान भरें या न भरें' वाली स्थिति। ऐसी परिस्थितियों में, विशेष रूप से बारामती जैसे हवाई अड्डों पर, जहां संचालन में सहायता के लिए बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं होते हैं, वास्तविक दृश्यता बताई गई दृश्यता से भिन्न हो सकती है और इससे भी कम हो सकती है। विमान में पायलट को बताई गई दृश्यता दिखाई नहीं देती है, इसलिए यह खराब मौसम, तकनीकी समस्याओं या पायलट के निर्णय की त्रुटि का मिलाजुला परिणाम हो सकता है।'
खालिद ने कहा कि चल रही जांच से पता चलेगा कि क्या कोई तकनीकी खामियां थीं। उन्होंने कहा, 'इसकी जांच चल रही है और डीजीसीए ने पहले ही विमान से संबंधित सभी दस्तावेजों को अपने नियंत्रण में ले लिया है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि रिलीज के समय कोई तकनीकी खामियां थीं या नहीं।'
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अन्य विमानन विशेषज्ञों ने क्या बताया?
एक अन्य विमानन विशेषज्ञ दिप्तेश चौधरी ने कहा कि कम दृश्यता और अंतिम चरण में रनवे से सही संरेखण न होना भी दुर्घटना का कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि पुणे में दृश्यता लगभग 2500 मीटर थी और बारामती में इससे भी कम हो सकती है। संभव है कि विमान अंतिम अप्रोच में रनवे के साथ सही तरीके से संरेखित न हो पाया हो। वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं विमानन विशेषज्ञ डॉ. अशोकन ने कहा कि दुर्घटना का सही कारण केवल ब्लैक बॉक्स और जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगा। उन्होंने कहा कि घटना का सटीक कारण जांच और ब्लैक बॉक्स डेटा से मिली जानकारी के बाद ही पता चल पाएगा। मौसम की स्थिति और नियंत्रण प्रणाली में खराबी इसके कारण हो सकते हैं।
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