कैंसर पीड़ित पूर्व आईएएस अफसर शरवरी गोखले ने मौत से पहले अपनी संपत्ति को मस्तिष्क शोध के लिए दान कर दिया। महाराष्ट्र कैडर के 1974 बैच की आईएएस अफसर शरवरी पिछले तीन वर्षों से कैंसर पीड़ित थीं। मरने से छह दिन पहले वह भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू की स्वायत्त संस्था केंद्रीय मस्तिष्क शोध (सीबीआर) के नाम पूरी वसीयत कर गईं। इसमें मुंबई के एक पॉश इलाके में स्थित फ्लैट भी शामिल है।
शरवरी गोखले अपनी 36 साल की सेवा में अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के पद पर थीं। कैंसर के कारण उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट लेना पड़ा था। उनके बेहद करीबी और महाराष्ट्र के पूर्व गृह सचिव चंद्रा अयंगर ने बताया कि शरवरी पिछले तीन सालों से अपना इलाज करा रही थीं। छह से सात महीने पहले उन्होंने अपनी पूरी पूंजी किसी नेक काम में खर्च करने का फैसला किया। शरवरी के अमेरिका में रहने वाले भाई जगदीश ने शोध संस्थान को फ्लैट दान देने के पीछे उनके (शरवरी) विज्ञान के प्रति आकर्षण को कारण बताया।