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खाम फार्मूले के सूत्रधार सोलंकी ने गुजरात में कांग्रेस को दिलाई थी रिकॉर्ड जीत

Sun, 10 Jan 2021 12:19 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, अहमदाबाद
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माधव सिंह सोलंकी - फोटो : Twitter
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पत्रकारिता से राजनीति में कदम रखने वाले माधव सिंह सोलंकी एक मंझे हुए रणनीतिकार थे। उनके खाम फार्मूले ने 1985 में कांग्रेस को गुजरात में बड़ी जीत दिलाई थी, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

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सोलंकी का शनिवार को 93 साल की उम्र में निधन हो गया। वह गुजरात में चार बार मुख्यमंत्री रहने के साथ ही कुछ समय के लिए देश के विदेश मंत्री भी रहे।

गुजरात में भाजपा और पार्टी के एक मुख्य नेता के तौर पर नरेंद्र मोदी के उभरने से पहले सोलंकी प्रदेश की राजनीति की धुरी थे। यह उनके राजनीतिक कौशल का ही नतीजा था कि 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 182 में से 149 सीटें जीती और प्रदेश के चुनाव में जीत का यह रिकॉर्ड अब तक नहीं टूट सका।

भरूच के पिलुदरा गांव के साधारण परिवार में पैदा हुए सोलंकी ने अपने करियर की शुरुआत गुजरात समाचार अखबार से एक पत्रकार के रूप में की।

बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1957 में पहली बार तत्कालीन बॉम्बे राज्य में विधायक बने। उस वक्त महाराष्ट्र और गुजरात अस्तित्व में नहीं आए थे।
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वह 1960 में गुजरात विधानसभा के सदस्य चुने गए। 1975 में कांग्रेस की गुजरात इकाई के अध्यक्ष बने गए। इसके बाद से वह राजनीतिक बुलंदियों को छूते चले गए। सोलंकी दिसंबर, 1976 में राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 1977 तक इस पद पर रहे। 1980 में वह फिर से मुख्यमंत्री बने।

राज्य में क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी, मुसलमान (खाम) के गठजोड़ की उनकी सोशल इंजीनियरिंग सफल रही और कांग्रेस के लिए कारगर साबित हुई। उन्हें मार्च, 1985 में ओबीसी आरक्षण को मंजूरी देने के बाद हुए आंदोलन के चलते मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा।

बाद उन्होंने ‘खाम’ को कांग्रेस के पक्ष में लामबंद करने का प्रयास किया और सफल रहे। 1985 के चुनाव में कांग्रेस को 149 सीटें मिलीं।

बहरहाल, आरक्षण विरोधी आंदोलन के जारी रहने और सांप्रदायिक दंगों के कारण सोलंकी को जुलाई, 1985 में फिर से इस्तीफा देना पड़ा। वह चौथी बार दिसंबर, 1989 से मई 1990 तक मुख्यमंत्री रहे। नरेंद्र मोदी से पहले वह गुजरात में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे।

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