हाईकोर्ट ने धन शोधन मामले में जेल में बंद फोर्टिस हेल्थकेयर और रैनबैक्सी कंपनी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की अंतरिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। शिविंदर ने जेल में कोरोना का खतरा बताते हुए बचने के लिए सामाजिक दूरी के मानदंड की पूर्ति न होने की दलील देकर जमानत मांगी थी।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की एकल पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के बाद कहा कि शिविंदर सिंह पर एक से ज्यादा मामले चल रहे हैं और किसी में भी जमानत नहीं मिली है। शिविंदर पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून और मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत मामले हैं। इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती। शिविंदर सिंह ने 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगते हुए याचिका में कहा था कि जेल में बहुत भीड़ है। वहां सामाजिक दूरी को बरकरार नहीं रखा जा सकता। इसलिए उसे कोरोना संक्रमण का खतरा है। याचिका में उन्होंने कहा कि उन्हें हेल्थ सेक्टर का अच्छा-खासा अनुभव है। उत्तराखंड में बाढ़ के समय उन्होंने बहुत अच्छा काम किया था। उन्हें जमानत पर रिहा कर लोगों की मदद के लिए उनके अनुभवों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
याचिका में दलील थी कि शिविंदर के खिलाफ तीनों मामलों में जांच पूरी हो चुकी है। इस मामले में साक्ष्य दस्तावेज में उपलब्ध हैं। इससे पूर्व एक रिश्तेदार की मौत के समय शिविंदर को एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया था। इस अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्होंने रिट याचिका दायर की है, जमानत याचिका नहीं। हाईपावर कमेटी ने कैदियों को रिहा करने का जो मानदंड तय किया है, उसे भी चुनौती नहीं दी गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हाईपावर कमेटी को ही फैसला लेने का अधिकार दिया था। पुलिस ने पीठ को बताया कि शिविंदर को अलग सेल में रखा गया है, जिससे उन्हें कोरोना संक्रमण का कोई सवाल ही नहीं है। उधर, ईडी ने भी अंतरिम जमानत का विरोध किया था।