चुनावी प्रक्रिया में एक अहम बदलाव लाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन आज 85 वर्ष की उम्र में ओल्ड एज होम में अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं। शेषन ने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम कदम उठाए थे।
उन्होंने बतौर मुख्य चुनाव आयुक्त पूरे चुनावी सिस्टम के ढांचे को ही बदल कर रख दिया था। जिसकी मिसाल लोग आज भी देते नहीं थकते। लेकिन इस बदलाव के पीछे की शख्सियत आज अपना बुढ़ापा चेन्नई में अपने घर से 50 किलोमीटर दूर एक ओल्ड एज होम में गुजार रहे हैं।
चरणों में वोटिंग की परंपरा की शुरुआत
शेषन के कार्य को पहली बार सराहना तब मिली जब उन्होंने बिहार में पहली बार निष्पक्ष चुनाव करवाए। यह चुनाव शेषन के लिए एक चुनौती था। इससे पहले बिहार में हुए चुनावों में बूथ कैप्चरिंग, हिंसा और गड़बड़ी के मसले आम थे, लेकिन शेषन ने बिहार में चुनावी प्रक्रिया में बदलाव लाकर अपनी समझदारी का दिया। शेषन ने यहां निष्पक्ष चुनाव के लिए पहली बार उन्होंने चरणों में वोटिंग कराने की परंपरा शुरू की।
साईबाबा के रहे हैं भक्त
बेहतरीन चुनाव आयुक्त के अलावा शेषन बेहद धार्मिक भी हैं। वे साईं बाबा के भक्त रहे हैं। 2011 में साई बाबा के देह त्यागने के बाद वे सदमे में आ गए थे। जिसके बाद उन्होंने किसी से भी बात करना बंद कर दिया।
एक अखबार की मानें तो शेषन को भूलने की बीमारी हो गई थी जिसके चलते उन्हें एसएसम रेजिडेंसी' में शिफ्ट करवा दिया। तीन साल बाद सामान्य होने के बाद अपने फ्लैट में रहने आ गए। लेकिन अभी भी वह कई दिनों के लिए ओल्ड एज होम चले जाते हैं।