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ED: पीएमएलए पर 'सुप्रीम' फैसले से और मजबूत हो गई है ईडी, पूर्व निदेशक करनाल सिंह ने कही यह बड़ी बात

Sun, 31 Jul 2022 10:54 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में बोलते हुए ईडी के पूर्व निदेशक करनाल सिंह ने कहा कि इससे एजेंसी के हाथ और मजबूत हो गए हैं। हालांकि अदालत के इस आदेश के बाद जांच एजेंसी की जवाबदेही में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने ये बयान धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दिया है। 
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प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : social media
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विस्तार
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ईडी के पूर्व निदेशक करनाल सिंह (Karnal Singh) ने रविवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भी मजबूत हो गई है। उन्होंने दावा किया कि अब ईडी बिना कोई मामला दर्ज किए भी किसी के खिलाफ छापे की कार्रवाई कर सकती है। इतना ही नहीं, ईडी किसी की संपत्ति कुर्क भी कर सकती है। उन्होंने ये बयान धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले पर दिया है। 

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बढ़ गई एजेंसी की जवाबदेही
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश के बारे में बोलते हुए करनाल सिंह ने कहा कि इससे एजेंसी के हाथ और मजबूत हो गए हैं। हालांकि अदालत के इस आदेश के बाद जांच एजेंसी की जवाबदेही में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्राथमिक अपराध के बिना भी संपत्ति की कुर्की की जा सकती है यदि ईडी अधिकारी संतुष्ट है कि एक प्राथमिक अपराध मौजूद है।  

27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
गौरतलब है कि बीती 27 जुलाई को प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट(PMLA) पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था। 545 पन्नों के इस फैसले में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से दर्ज केस में फंसे लोगों को झटका देते हुए कोर्ट ने पीएमएलए कानून के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 2018 में कानून में किए गए संशोधन सही हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय(ED) के सभी अधिकारों को बरकरार रखा है। 
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं 100 से ज्यादा याचिकाएं
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में पीएमएलए के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए 100 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई थीं। इसमें ईडी की शक्तियों, गिरफ्तारी के अधिकार, गवाहों को समन व संपत्ति जब्त करने के तरीके और जमानत प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाएं कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम, एनसीपी नेता अनिल देशमुख व अन्य की ओर से दायर की गई थीं। 

सीआरपीसी का पालन करने के लिए बाध्य हो एजेंसी 
याचिकाओं में कहा गया था कि पीएमएलए कानून के तहत गिरफ्तारी, जमानत, संपत्ति की जब्ती का अधिकार सीआरपीसी के दायरे से बाहर हैं। इस कानून के कई प्रावधान असैंवधानिक हैं, क्योंकि संज्ञेय अपराध की जांच और ट्रायल के बारे में दी गई प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है। याचिकाओं में कहा गया कि जांच एजेंसी को जांच करते समय सीआरपीसी का पालन करने के लिए बाध्य होना चाहिए। इस मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई वकीलों ने अपना पक्ष रखा था। 

17 साल में सिर्फ 23 ठहराए गए हैं दोषी 
केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि पीएमएलए कानून 17 साल पहले लागू हुआ था। तब से अब तक इस कानून के तहत 5,422 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि, सिर्फ 23 लोगों को ही दोषी ठहराया गया है। 31 मार्च तक ईडी ने एक लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच की है और 992 मामलों में चार्जशीट दायर की है। 

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