अयोध्या में मंदिर ढहाया गया या किसी आपदा में खुद गिर गया, प्राचीन धार्मिक, साहित्यिक व ऐतिहासिक ग्रंथों के आधार पर राम का जो कालखंड माना जाता है, तब वर्तमान अयोध्या में मानवीय गतिविधियां थीं भी या नहीं, ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके उत्तर के आखिर में विस्मयबोधक चिह्न जरूर लगाने पड़ेंगे। दरअसल, जवाब के साथ अकाट्य प्रमाण नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्य ही उपलब्ध हैं।
वहां मंदिर होने के प्रमाण तो हैं, लेकिन उसे तोड़कर मस्जिद बनाने के सुबूत नहीं। एएसआई की आधिकारिक रिपोर्ट में तीन मुख्य बातें कही गई हैं। एक, मस्जिद रिक्त भूमि (बैरन लैंड) पर नहीं बनाई गई। दो, विवादित स्थल और उसके आसपास करीब 3200 साल से मानवीय एवं आवासीय गतिविधियों के प्रमाण मिल चुके हैं।
तीन, दसवीं शताब्दी के आसपास विवादित परिसर में मंदिर होने के सुबूत भी मिले हैं। पहले तथ्य से एकदम स्पष्ट है कि मस्जिद से पहले वहां कोई भवन था। क्या यह भवन ढहाया गया या किसी प्राकृतिक आपदा में गिरा? इस पर अभी तक ऐतिहासिक व पुरातात्विक अकाट्य प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं।