बॉलीवुड के कई नामचीन कलाकारों के पूर्व खानसामा को उत्तर प्रदेश के भू-राजस्व रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वाराणसी के कलेक्टर से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। जमीन हड़पने के लिए स्वजनों ने ही यह साजिश रची।
बॉलीवुड फिल्मों में जिंदा व्यक्ति को मृत दिखाने व उसकी संपत्ति हड़पने और उसके अचानक सामने आने जैसी कहानियां आम हैं, लेकिन उसी से जुड़े रहे व्यक्ति की रियल लाइफ में भी ऐसा हो गया। पीड़ित खानसामा संतोष सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील राधा कांत त्रिपाठी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है।
सिर्फ इतना था कसूर
संतोष सिंह अभिनेता नाना पाटेकर जैसे बॉलीवुड के कई कलाकारों का खानसामा रहा है। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने 2003 में एक दलित लड़की से शादी कर ली थी। जबकि वह खुद ठाकुर समुदाय का है, इसलिए उसके परिजन इस विवाह के लिए तैयार नहीं थे। उसके चचेरे भाई ने उसकी शादी के बाद उसे मृत घोषित करने का निर्णय लिया था। इसी के अनुरूप दस्तावेज भी बनवा लिए गए।
आयोग ने वाराणसी कलेक्टर से मांगी रिपोर्ट
मामला संज्ञान में आने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वाराणसी के जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर मामले की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कलेक्टर से पूछा है कि आखिर एक जिंदा व्यक्ति को राजस्व अभिलेख में मृत कैस दिखा दिया गया? आयोग ने दोषी अफसरों को दंडित करने का भी निर्देश दिया है।
12.1 एकड़ जमीन है संतोष सिंह की
वकील राधा कांत त्रिपाठी के अनुसार संतोष सिंह के परिजनों ने उसे मृत घोषित कराकर भू-रिकॉर्ड से उसका नाम से हटवा दिया है। अब वह अपनी 12.1 एकड़ जमीन वापस पाने के लिए कानूनी मदद ले रहा है। यह जमीन वाराणसी जिले के चित्तौनी गांव में है। इस पर उसके चचेरे भाइयों ने उसे मृत बताकर कब्जा कर लिया है।