कोरोना वायरस के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा रेमडेसिविर को लेकर महाराष्ट्र में राजनीति गरमा गई है। दरअसल, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहां का सप्लायर भाजपा नेताओं के अनुरोध पर राज्य को रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गया था। हालांकि, महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों से पल्ला झाड़ दिया है। पुलिस का कहना है कि दवा की कालाबाजारी ना हो इसलिए वह बस स्टॉक की जांच के लिए निकले थे।
आरोपों को किया खारिज
इधर, डीसीपी ने पूर्व मुख्यमंत्री के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है। हमने बस उसे पूछताछ के लिए बुलाया था क्योंकि हमें एंटीवायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी की सूचना मिली थी।
दवा कंपनी के निदेशक से फिर हो सकती है पूछताछ
इस बीच, मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि ब्रुक फार्मा कंपनी के निदेशक राजेश डोकानिया से शनिवार की रात पूछताछ की गई थी। जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा बुलाया जा सकता है। पुलिस ने कहा कि उनके पास सूचना थी कि रेमडेसिविर इंजेक्शनों को हवाई मार्ग से विदेश भेजने की तैयारी थी, जबकि इस दवा के निर्यात पर प्रतिबंध है। अधिकारी ने कहा, डोकानिया से बीकेसी थाने में पूछताछ की गई। बाद में उन्हें जाने दिया लेकिन कहा कि जब भी पूछताछ की जरूरत पड़ेगी, उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा।
मुंबई पुलिस के प्रवक्ता एस. चैतन्य ने रविवार को एक बयान में कहा कि दवा कंपनी के निदेशक को पूछताछ के लिए जब थाने लाया गया तो उस वक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की एक टीम भी वहां मौजूद थी। इंजेक्शन की 60 हजार शीशियों को अभी तक जब्त नहीं किया गया है।