भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने मंगलवार को भारतीय चुनाव आयोग से विदाई ली। विदाई के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने "लोकतंत्र की पूजा स्थली" बताया। उन्होंने आयोग के भविष्य के बारे में आशा जताते हुए कहा कि आने वाली टीम इसे आज से भी ऊंचा उठाएगी। राजीव कुमार ने लोकतंत्र को मजबूत करने में मतदाताओं और राजनीतिक दलों की भूमिका की सराहना की। साथ ही देश के सभी मतदाताओं को शुभकामनाएं दीं।
महिला मतदाताओं की भूमिका की सराहना की
उन्होंने मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता जताई, ताकि नकल से बचा जा सके। साथ ही, राजनीतिक दलों द्वारा खर्च की ऑनलाइन रिपोर्टिंग की शुरुआत की सराहना की, और इसे बेहतर वित्तीय पारदर्शिता के लिए अनिवार्य करने की बात की। साथ ही कुमार ने यह भी कहा कि अनियमित सोशल मीडिया एल्गोरिदम चुनावों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, जिन्हें तत्काल संबोधित किया जाना चाहिए। अंत में, उन्होंने कहा कि चुनाव प्रबंधन में भारत की विशेषज्ञता देश की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर है।
दुनिया में सम्मान पाएगा भारतीय लोकतंत्र- कुमार
विदाई समारोह के दौरान राजिव कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत रहेगा और दुनिया में सम्मान पाएगा। इस प्रक्रिया में मतदाताओं और राजनीतिक दलों का बड़ा योगदान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत का चुनावी मॉडल दुनिया भर में अन्य देशों के लिए एक उदाहरण बनेगा।
कुमार के कार्यकाल में कई अहम बदलाव, एक नजर
राजीव कुमार ने चुनाव आयोग में अपने 4.5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें चुनावी प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा दिया गया। उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग ने कई चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न किए, जिसमें 2022 के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और राज्यसभा के नवीनीकरण शामिल हैं।
सोशल मीडिया को लेकर भी किए बदलाव
साथ ही उन्होंने चुनावों में सुरक्षा बढ़ाने, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं से निपटने के लिए कदम उठाए, और महिला मतदाताओं की अधिक भागीदारी को सराहा। उनके कार्यकाल के दौरान, चुनाव आयुक्तों ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को सरल किया और युवा मतदाताओं के लिए पंजीकरण सुविधाएं बढ़ाईं। कुमार का योगदान चुनावी सुधारों और प्रौद्योगिकी-संचालित व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण था।