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मनमोहन सिंह और राजन के बचाव में आए पूर्व बैंकिंग सचिव, बोले- ब्लेम गेम में न पड़ें वित्त मंत्री

Wed, 16 Oct 2019 08:02 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रघुराम राजन ने कोई बड़ा काम या बैंकिंग सुधार नहीं किया था
  • परिस्थिति के अनुरूप पूर्व गर्वनर ले रहे थे फैसला
  • मौजूदा सरकार के पास आर्थिक सोच, समझ, निर्णय लेने की क्षमता कमी
  • सरकार लगा रही है लोन कैंप, 30-40 फीसदी की दर से बढ़ रहा है एनपीए
  • उपाय नहीं सूझ रहा है तो सरकार कदम न उठाकर बढ़ा रही है समस्या
  • सरकार बताए साढ़े पांच साल में क्या किया?
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भाषण देते हुए पूर्व बैंकिंग सेक्रेटरी डीके मित्तल - फोटो : PIB (File)
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विस्तार
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय में देश के बैंकिंग सचिव रह चुके डीके मित्तल ने वित्त मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डीके मित्तल ने कहा कि वित्त मंत्री को ब्लेम गेम में पड़ने की बजाय बताना चाहिए कि मई 2014 से अब तक की मौजूदा सरकार ने क्या किया है? इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देश की खराब बैंकिंग अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराने पर कठघरे में खड़ा किया था।

हाल में सरकार ने क्यों किया कैंप लगा लोन बांटने का एलान?

पूर्व बैंकिंग सचिव का कहना है कि केंद्र सरकार की बैंकिंग और अर्थव्यवस्था विकास से जुड़ी सोच, समझ और निर्णय लेने की क्षमता को लेकर सवाल उठने लगे है। वह कहते हैं कि अर्बन बैंक, पीएमसी बैंक और उसके खाताधारकों की स्थिति देखिए। उसके खाताधारक जान दे रहे हैं और सरकार निरुत्तर खड़ी है। केंद्रीय वित्त मंत्री आरोप लगा रही हैं कि पिछली सरकारों ने एक फोन पर बैंकों का लोन दिलाया और सस्ती दरों पर धड़ल्ले से लोन दिया। वित्त मंत्री को बताना चाहिए कि फिर केंद्र सरकार ने कैंप लगाकर लोन बांटने की हाल में घोषणा क्यों की, ऐसा क्यों किया जा रहा है? 30-40 प्रतिशत तक एनपीए की स्थिति क्यों है?

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इस सरकार में जो लोन बांटे गए उसमें एनपीए क्यों बढ़ रहा है। पूर्व बैंकिंग सचिव के अनुसार मौजूदा सरकार यह तय नहीं कर पा रही है कि उसे बैंकिंग सुधार में कौन सा कदम उठाना चाहिए। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या करना चाहिए? उद्योगपतियों, कारोबारियों, निवेशकों का भरोसा बनाने के लिए क्या निर्णय लेना चाहिए?

रघुराम राजन को दोष मत दीजिए

डीके मित्तल ने कहा कि पूर्व बैंकिंग सचिव रघुराम राजन अच्छे स्कॉलर हैं। उन्हें अर्थशास्त्र की गहरी समझ है, लेकिन उन्होंने कोई बड़ा बैंकिंग सुधार नहीं किया था। राजन ने कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया था। वह उस समय की अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखकर फैसले ले रहे थे। वह कहते हैं, उन्होंने बैंकिंग सुधार को लेकर कोई बड़ा फैसला किया हो, तो मुझे बताएं? डीके मित्तल ने कहा कि मौजूदा सरकार ब्लेम गेम की आदी हो गई है। सरकार को आरोप ही लगाना है, तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बजाय पंडित नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा पर लगाए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री यह नहीं बता पा रही हैं कि पिछले पांच से अधिक साल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने क्या किया है? वह आगे का रोड मैप तो बताएं कि कैसे अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में खड़ी जटिल स्थिति से देश को बाहर लाएंगी?

समस्या के बढ़ने का इंतजार कर रही है सरकार

पूर्व बैंकिंग सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार ने नोटबंदी और उसके बाद जिस तरह से जीएसटी पर फैसला लिया, उससे देश का आर्थिक इक्विलिब्रियम (साम्य, परस्पर तारतम्य) बिगड़ गया है। इसके कारण आज निवेशक, कारोबारी, उद्योगपति देश की बजाय बाहर पैसा भेजकर कामकाज को शुरू करने की तरफ बढ़ रहे हैं। निराशा की स्थिति बढ़ रही है। सरकार कुछ कदम उठाए तो आगे बात बन सकती है, लेकिन सरकार निर्णय लेने के बजाय अकर्मण्य बनकर समस्या के बढ़ने का इंतजार कर रही है। डीके मित्तल का कहना है कि एसबीआई, दीवान फाइनेंस, इंडिया बुल्स की स्थिति क्या सरकार को पता नहीं है? लेकिन सरकार क्या कर रही है? चिंता का विषय है।

सरकार उठाए कुछ ऐसे कदम

  • वित्तमंत्री को चाहिए वह कुछ पहल करें। देश की सभी एनपीए कंपनियों, संस्थानों को एक श्रेणी में लेकर आने, कुछ ठोस निर्णय लेने की पहल करें। इसके लिए मलयेशिया जैसा मॉडल अपनाने की जरूरत है।
  • सीआरआर की दर अभी चार फीसदी है। जिसे घटाकर तीन फीसदी तक कर देना चाहिए।
  • कारोबारियों, निवेशकों में उत्साह बढ़ाने के कदमों को लागू करना चाहिए। इससे अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा, रोजगार बढ़ेगा और जब अर्थव्यवस्था में सुधार होता है तो हर क्षेत्र सुधार की तरफ बढ़ता है।
  • दीवान फाइनेंस, इंडिया बुल्स जैसे संस्थानों की समस्या पर बैठने के बजाय केंद्र को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए शीर्ष अधिकारियों को बैठाना चाहिए।
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