असम में ईद-उल-जुहा से पहले राजनीतिक और सांप्रदायिक माहौल को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच पूर्व विधायक अली अकबर मियां को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और पुलिस के खिलाफ कथित भड़काऊ बयान देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
वायरल वीडियो के बाद कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धुबरी जिले की बिलासीपारा पश्चिम विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे अली अकबर मियां ने एक वीडियो में कथित रूप से ऐसे बयान दिए, जिन्हें भड़काऊ माना गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद जिला स्तर पर नियमित सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान पुलिस की नजर इस पर पड़ी।
हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए शुक्रवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि मियां ने यह बयान किस परिस्थिति और उद्देश्य से दिया था। फिलहाल उनके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
क्या कहा था वीडियो में?
बताया जा रहा है कि वीडियो में अली अकबर मियां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को जिद्दी रवैया न अपनाने और लोगों की भावनाओं को समझने की सलाह देते सुनाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यदि पुलिस निजी तौर पर किए जा रहे पशु बलिदान को रोकने की कोशिश करेगी, तो स्थिति हिंसक हो सकती है और पुलिसकर्मियों पर हमले तक हो सकते हैं। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
ईद-उल-जुहा और सांप्रदायिक सौहार्द का मुद्दा
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब असम के कई ईदगाह समितियों ने मुस्लिम समुदाय से ईद-उल-जुहा के दौरान गायों की कुर्बानी से बचने की अपील की है। धुबरी समेत कई जिलों में इस पहल को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी इन समितियों की पहल की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह के स्वैच्छिक कदम असम में साम्प्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
चुनाव हार चुके हैं अली अकबर मियां
गौरतलब है कि अली अकबर मियां हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वह लगातार राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय बने हुए थे।