देश में कोरोना के मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। संक्रमण दर दस फीसदी से नीचे है और ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का दावा है कि असल मामलों का आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी देश में संक्रमण और मौतों के सही आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में तीन संभावित अनुमान बताए हैं। पहला, हरसंभव कटौती के बाद संभावित संक्रमितों की संख्या 40.42 करोड़ होगी, जबकि संभावित मौतों का आंकड़ा 600,000 होगा।
वहीं, अगर और अधिक संभावित स्थिति की बात करें तो संभावित संक्रमितों का आंकड़ा 53.9 करोड़ होगा, जबकि मौतों का आंकड़ा 16 लाख होगा। वहीं, सबसे खराब स्थिति में संभावित संक्रमितों का आंकड़ा 70.07 करोड़ होगा, जबकि मौतों का आंकड़ा 42 लाख होगा। ये तीनों ही स्थिति सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़े से कई ज्यादा हैं।
इस रिपोर्ट में भारत सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए गए 24 मई के आंकड़ों को आधार बनाया गया है जिसमें कुल मामलों की संख्या 2.69 करोड़ बताई गई थी जबकि मौतों की संख्या 3.7 लाख के करीब बताई गई थी।
मामलों में क्यों इतना अंतर
विश्व स्वास्थ्य संगठन की शुक्रवार को एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें बताया गया है कि दुनिया भर में कोरोना से हुई मौतों का असल आंकड़ा दर्ज किए गए आंकड़े से 2 से 3 गुना ज्यादा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में की इस रिपोर्ट को भी आधार बनाया गया है।
भारत में सरकारी मौतों का आंकड़ा असल आंकड़े से कम इसलिए भी बताया जा रहा है कि क्योंकि कई कोरोना के मरीज ऐसे थे, जिन्होंने होम आइसोलेशन में या एंबुलेंस में दम तोड़ा जिसके चलते उनकी गिनती सरकारी आंकड़ों में नहीं हो पाई।
एमोरी यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ कायोको शिहोदा के अनुसार इसके अलावा परिवारवालों की तरफ से जानकारी न मिलना और रिकॉर्ड रखने में भी लापरवाही बरतना इसका एक कारण है। ग्रामीण इलाकों में हुई मौतें भी सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाई। यही स्थिति संक्रमित के मामलों को लेकर भी थी।