तस्वीरों में दिख रहा है कि कमरे की दीवारों पर उधड़ा हुआ पेंट है। साथ ही कम्यूनल बाथरूम भी है। संसी को ये आईडिया डेविड ने दिया था। दोनों का संपर्क इंटरनेट के जरिए हुआ। डेविड का कहना है कि इस आईडिया से किसी गरीब की आय बढ़ेगी। साथ ही दो तरह के लोग (विदेशी और झुग्गीवासी) जो कभी नहीं मिले हैं, वह मिल पाएंगे। उन लोगों को एक दूसरे को जानने का मौका भी मिलेगा।
इस पहल से जहां कुछ लोग खुश हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कॉन्सेप्ट से दुनिया में भारत की गलत छवि प्रस्तुत की जा रही है। असल में भारत इससे बेहद अलग है। माना कि भारत में झुग्गी झोपड़ियां हैं लेकिन पूरा भारत ऐसा नहीं है। भारत की असली तस्वीर इससे काफी अलग है।
इस पहल की सोशल मीडिया पर भी खूब आलोचना की जा रही है। लोगों का कहना है कि किसी देश की गरीबी न तो कोई सांस्कृतिक धरोहर है और न ही ऐसी चीज जिसपर गर्व महसूस किया जा सके। जो लोग यहां आकर ठहरेंगे वो तो अपने देश जाकर यहीं कहेंगे कि उन्होंने भारत में झुग्गी झोपड़ी देखी हैं।