विदेश यात्रा पहली बार भारतीयों द्वारा विदेशों में धन खर्च करने का एक बड़ा कारण बन गया है। पिछले साल तक भारतीय अपने रिश्तेदारों के देखभाल और शिक्षण के लिए विदेशों में धन खर्च करते थे।
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विदेशों में धन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उदारीकृत प्रेषण योजना(लिब्रलाइज्ड रिमिटेंस स्कीम) के तहत भेजा जाता है। इस योजना के अनुसार किसी भी व्यक्ति को विदेशों को सालाना 250,000 डॉलर यानी करीब 1 करोड़ इकसठ साल भारतीय रुपए भेजने की अनुमति है।
कई साल पहले तक भारतीयों द्वारा विदेश यात्रा पर खर्च विदेशों में धन भेजने की वजहों में तीसरे नंबर पर था। जबकि इस चालू वित्त वर्ष के दौरान ये पहले नंबर की कारण बन गया।
वित्त वर्ष 2017 में यात्रा के लिए धन भेजने में 3.6 गुना से 2.3 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो भारतीयों द्वारा कुल अंतर्राष्ट्रीय खर्च का एक तिहाई था। जबकि वित्त वर्ष 2016 में, यात्रा पर कुल खर्च 651 मिलियन डॉलर था जो विदेशों में कुल धन भेजने का केवल 15 प्रतिशत था।
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सेंट्रम डायरेक्ट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और ट्रेजरी विभाग के प्रमुख एम हरिप्रसाद के बताया कि हमनें थाईलैंड, दुबई और खाड़ी के देशों में यात्रा को लेकर अच्छी वृद्धि देखी है। सस्ते टिकट दरों और ऑफरों की वजह से अंतरराष्ट्रीय यात्रा तक बहुत से लोगों की पहुंच हो पाई है।
2013 जब भारतीय रुपए की मूल्य में गिरावट आई थी तब विदेशों में पैसे भेजने की सीमा 200,000 डॉलर से घटकर 70,000 डॉलर हो गई थी। बाद में जब ये सीमा बहाल हुई तब मई 2015 में इसे बढ़ाकर 250,000 डॉलर कर दिया गया।
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विदेशी मुद्रा सीमाओं में छूट की तुलना में, रुपए की मजबूती से विदेशी यात्रा बढ़ी है। हालांकि, यात्रा कंपनियां इसमें केवल सामान्य वृद्धि देख रही हैं क्योंकि क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से प्रत्यक्ष व्यय हो रहा है।