नोटबंदी के कारण इस बार भारत के बजट पर पूरी दुनिया ने निगाहें जमाए रखीं थीं। चूंकि भारत में नोटबंदी के बाद वेनेजुएला में भी नोटबंदी की गई और पाकिस्तान में भी 5000 का नोट बंद करने की मांग उठने लगी है, अमेरिका व जर्मनी भी भारत की नोटबंदी का गहन अध्ययन करने में जुटा है, इसलिए इस बार के भारत का बजट वैश्विक मीडिया के लिए खास था।
मीडिया ने माना कि भारत का बजट नोटबंदी के दुष्प्रभावों से निपटने पर केंद्रित था जिसमें गरीबों व मध्यमवर्ग के हितों पर अधिक फोकस किया गया।‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने कहा है कि भारत सरकार के इस बजट में टैक्स कटौती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उभारने का संकल्प दिखाई देता है।
इसमें यह संदेश भी छुपा है कि मोदी सरकार गरीबों के हित में देश के अमीरों के खिलाफ काम कर रही है। खासतौर पर देश से आर्थिक अपराध करके विदेश भाग जाने वालों के खिलाफ लाया जाने वाला कानून इसकी तस्दीक करता है।