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मोदी सरकार ने अमीरों पर की सख्ती, मध्यमवर्ग को दी सौगात: विदेशी मीडिया 

Thu, 02 Feb 2017 02:18 PM IST
एजेंसी
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वित्तमंत्री अरुण जेटली - फोटो : PTI
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नोटबंदी के कारण इस बार भारत के बजट पर पूरी दुनिया ने निगाहें जमाए रखीं थीं। चूंकि भारत में नोटबंदी के बाद वेनेजुएला में भी नोटबंदी की गई और पाकिस्तान में भी 5000 का नोट बंद करने की मांग उठने लगी है, अमेरिका व जर्मनी भी भारत की नोटबंदी का गहन अध्ययन करने में जुटा है, इसलिए इस बार के भारत का बजट वैश्विक मीडिया के लिए खास था।
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मीडिया ने माना कि भारत का बजट नोटबंदी के दुष्प्रभावों से निपटने पर केंद्रित था जिसमें गरीबों व मध्यमवर्ग के हितों पर अधिक फोकस किया गया।‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने कहा है कि भारत सरकार के इस बजट में टैक्स कटौती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उभारने का संकल्प दिखाई देता है।

इसमें यह संदेश भी छुपा है कि मोदी सरकार गरीबों के हित में देश के अमीरों के खिलाफ काम कर रही है। खासतौर पर देश से आर्थिक अपराध करके विदेश भाग जाने वालों के खिलाफ लाया जाने वाला कानून इसकी तस्दीक करता है। 
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'बजट नोटबंदी के चलते छाई मंदी से रिकवरी की कोशिश'

अमेरिका के ही ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने कहा है कि भारत का बजट सिर्फ नोटबंदी के चलते देश में छाई मंदी से रिकवरी की कोशिश है। नेपाल के अखबार ‘हिमालयन टाइम्स’ ने भी भारतीय बजट को गरीबों के लिए अच्छा बताया है।

जर्मनी की रेडियो सेवा ‘दाइचे वेले’ ने अपनी वेबसाइट पर भारत के बजट को बेहद संतुलित बताते हुए कैशलैस अर्थव्यवस्था के प्रावधानों की तारीफ की है। वेबसाइट ने राजनीतिक दलों के लिए कैश लेनदेन की सीमा पर अंकुश लगाने को भी बोल्ड फैसला बताया है।

पाकिस्तानी दैनिक ‘द ट्रिब्यून’ ने कहा है कि भारत ने अपने बजट में रक्षा पर खर्च बढ़ा दिया है, जो पाकिस्तान के लिए तनाव का विषय है। अखबार के मुताबिक भारत विदेशों से एयरक्राफ्ट व हथियारों की खरीद तथा परमाणु कार्यक्रम को रफ्तार दे सकता है, जो पाक के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे। इसी तरह ‘नवा-ए-वक्त’ ने भी भारत के बजट की आलोचना की है। 
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