भारत जी20-2023 की मेजबानी कर रहा है। इस दौरान जी20 देशों के नेताओं की घोषणा में रूसी आक्रमण का उल्लेख नहीं किया गया। जी20 नेताओं ने आह्वान किया कि सभी देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। बाली सम्मलेन के साथ तुलना पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बाली-बाली था और नई दिल्ली-नई दिल्ली है।
विदेश मंत्री- एक साल में काफी चीजें बदलीं
भारत ने ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया के साथ मिलकर जी20 देशों के बीच आम सहमति बनाने में कामयाब रहा। इन देशों ने आम सहमति के पाठ का मसौदा तैयार करने में भी मदद की जिसे हर देश ने स्वीकार किया। पिछले साल बाली में आयोजित शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मलेन के बीच तुलना किये जाने पर विदेश मंंत्री एस जयशंकर ने दो टूक जवाब दिया। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जयशंकर ने कहा कि बाली बाली था और नई दिल्ली नई दिल्ली है। बाली में आयोजित शिखर सम्मलेन को एक साल बीत गए हैं। तब चीजें अलग थीं। बीते एक साल के दौरान कई चीजें हुईं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक खंड में देखें तो कुल आठ पैराग्राफ हैं। इनमें से सात यूक्रेन पर केंद्रित हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परिणाम : एसडीजी
विदेश मंत्री ने कहा कि जी-20 लीडर्स ने आज जिस घोषणापत्र पर सहमति व्यक्त की है, वह मजबूत टिकाऊ, संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) की प्रगति में तेजी लाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए हमारी संस्कृति, परंपरा और विरासत को दर्शाने का एक अवसर था। उन्होंने यह भी कहा कि यह देखते हुए कि जी20 भूराजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को हल करने का मंच नहीं है, नेताओं ने माना कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसके महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं।
अफ्रीकन यूनियन को भारत की अध्यक्षता में जी-20 को स्थायी सदस्यता दी गई
जी-20 पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर बयान में कहा कि हमारे लिए यह संतुष्टि की बात है कि अफ्रीकन यूनियन को आज भारत की अध्यक्षता में जी-20 को स्थायी सदस्यता दी गई। हमारी अध्यक्षता का संदेश 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 में 20 सदस्य देशों नौ आमंत्रित देशों और 14 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया।
जी20 नेताओं ने यूक्रेन पर भी की चर्चा
एस जयशंकर ने कहा कि विशेष रूप से जी20 नेताओं ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध और विशेष रूप से विकासशील और सबसे कम विकासशील देशों पर इसके प्रभाव पर चर्चा की, जो अभी भी महामारी और आर्थिक व्यवधान से उबर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोजन, ईंधन और उर्वरक विशेष चिंता के मुद्दे हैं।